कुल्हाड़ी ️की धार
कुंदन काका एक फैक्ट्री में लकड़ियों के गट्ठर काटने का काम करते थे। फैक्ट्री मालिक उनके काम से बहुत खुश रहता और हर एक नए मजदूर को उनकी तरह कुल्हाड़ी चलाने को कहता। यही कारण था कि ज्यादातर मजदूर उनसे जलते थे।
एक दिन जब मालिक काका के काम की तारीफ कर रहे थे तभी एक नौजवान हट्टा-कट्टा मजदूर सामने आया और बोला, “मालिक! आप हमेशा इन्हीं की तारीफ़ करते हैं, जबकि मेहनत तो हम सब करते हैं… बल्कि काका तो बीच-बीच में आराम भी करने चले जाते हैं, लेकिन हम लोग तो लगातार कड़ी मेहनत करके लकड़ियों के गट्ठर काटते हैं।
इस पर मालिक बोले, “भाई! मुझे इससे मतलब नहीं है कि कौन कितना आराम करता है, कितना काम करता है, मुझे तो बस इससे मतलब है कि दिन के अंत में किसने सबसे अधिक लकड़ियों के गट्ठर काटे…। और इस मामले में काका आप सबसे 2-3 लकड़ियों के गट्ठर आगे ही रहते हैं…जबकि उन की उम्र भी हो चली है।”
मजदूर को ये बात अच्छी नहीं लगी।
वह बोला-
अगर ऐसा है तो क्यों न कल लकड़ियों के गट्ठर काटने की प्रतियोगिता हो जाए। कल दिन भर में जो सबसे अधिक लकड़ियों के गट्ठर काटेगा वही विजेता बनेगा।
मालिक तैयार हो गए।
अगले दिन प्रतियोगिता शुरू हुई। मजदूर बाकी दिनों की तुलना में इस दिन अधिक जोश में थे और जल्दी-जल्दी हाथ चला रहे थे।
लेकिन कुंदन काका को तो मानो कोई जल्दी न हो। वे रोज की तरह आज भी लकड़ियों के गट्ठर काटने में जुट गए।
सबने देखा कि शुरू के आधा दिन बीतने तक काका ने 4-5 ही लकड़ियों के गट्ठर काटे थे जबकि और लोग 6-7 लकड़ियों के गट्ठर काट चुके थे। लगा कि आज काका हार जायेंगे।
ऊपर से रोज की तरह वे अपने समय पर एक कमरे में चले गए जहाँ वो रोज आराम करने जाया करते थे।
सबने सोचा कि आज काका प्रतियोगिता हार जायेंगे।
बाकी मजदूर लकड़ियों के गट्ठर काटते रहे, काका कुछ देर बाद अपने कंधे पर कुल्हाड़ी टाँगे लौटे और वापस अपने काम में जुट गए।
तय समय पर प्रतियोगिता ख़त्म हुई।
अब मालिक ने लकड़ियों के गट्ठरों की गिनती शुरू की।
बाकी मजदूर तो कुछ ख़ास नहीं कर पाए थे लेकिन जब मालिक ने उस नौजवान मजदूर के लकड़ियों के गट्ठरों की गिनती शुरू की तो सब बड़े ध्यान से सुनने लगे…
1…2…3…4…5…6…7…8…9…10…और ये 11!
सब ताली बजाने लगे क्योंकि बाकी मजदूरों में से कोई 10 लकड़ियों के गट्ठर भी नहीं काट पाया था।
अब बस काका के काटे लकड़ियों के गट्ठरों की गिनती होनी बाकी थी…
मालिक ने गिनती शुरू कि…1…2…3…4…5…6…7…8…9…10… और ये 11 और आखिरी में ये बारहवां लकड़ियों के गट्ठर …। मालिक ने ख़ुशी से ऐलान किया…!!
कुंदन काका प्रतियोगिता जीत चुके थे। उन्हें 1000 रुपये इनाम में दिए गए।
तभी उस हारे हुए मजदूर ने पूछा, “काका, मैं अपनी हार मानता हूँ। लेकिन कृपया ये तो बताइये कि आपकी शारीरिक ताकत भी कम है और ऊपर से आप काम के बीच आधे घंटे विश्राम भी करते हैं, फिर भी आप सबसे अधिक लकड़ियों के गट्ठर कैसे काट लेते हैं?”
इस पर काका बोले-
बेटा बड़ा सीधा सा कारण है इसका जब मैं आधे दिन काम करके आधे घंटे विश्राम करने जाता हूँ तो उस दौरान मैं अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज कर लेता हूँ, जिससे बाकी समय में मैं कम मेहनत के साथ तुम लोगों से अधिक लकड़ियों के गट्ठर काट पाता हूँ।
सभी मजदूर आश्चर्य में थे कि सिर्फ थोड़ी देर धार तेज करने से कितना फर्क पड़ जाता है।
दोस्तों, आप जिस क्षेत्र में भी हों…। आपकी योग्यता आपकी कुल्हाड़ी है जिससे आप अपने लकड़ियों के गट्ठर काटते हैं… यानी अपना काम पूरा करते हैं…। शुरू में आपकी कुल्हाड़ी जितनी भी तेज हो…समय के साथ उसकी धार मंद पड़ती जाती है… !!
उदाहरण के लिए- भले ही आप कम्प्यूटर साइंस के अग्रणी रहे हों…लेकिन अगर आप नयी तकनीक, नयी भाषा नहीं सीखेंगे तो कुछ ही सालों में आप पुराने हो जायेंगे आपकी आपकी धार मंद पड़ जायेगी।
इसीलिए हर एक व्यक्ति को कुंदन काका की तरह समय-समय पर अपनी धार तेज करनी चाहिए…!! अपने उद्योग से जुड़ी नयी बातों को सीखना चाहिए, नयी विधि को प्राप्त करना चाहिए और तभी सैकड़ों-हज़ारों लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बना पायेंगे, आप अपने क्षेत्र के विजेता बन पायेंगे!
लगातार सीखते रहना ज़रूरी है – जैसे कुंदन काका समय निकालकर कुल्हाड़ी की धार तेज करते थे, वैसे ही हमें भी अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करते रहना चाहिए।
सिर्फ मेहनत नहीं, स्मार्ट वर्क भी ज़रूरी है – कड़ी मेहनत तब और असरदार होती है जब उसमें सही रणनीति जुड़ी हो।
आराम करना समय की बर्बादी नहीं, बुद्धिमानी है – कुंदन काका जैसे समझदार लोग जानते हैं कि थोड़ा रुककर खुद को बेहतर बनाना कितना आवश्यक है।
धैर्य और अनुशासन का महत्व – काका ने बिना किसी दिखावे या घमंड के अपना काम किया और शांति से प्रतियोगिता भी जीत ली।
योग्यता और अनुभव का सम्मान करें – युवा जोश महत्वपूर्ण है, लेकिन अनुभवी लोगों की समझ और परिपक्वता कई बार ज़्यादा काम आती है।
सिर्फ तेजी से काम करना ही सफलता की गारंटी नहीं है, सही तरीके से, निरंतर खुद को निखारते हुए काम करना असली कुंजी है!

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