रामनवमी एक नया कीर्तिमान बनाया है !

माने ना मेरा दिल दीवाना


 कल देश भर में रामनवमी का त्यौहार शांतिपूर्वक मना लिया गया । इस बार के रामनवमी के त्यौहार ने देश में एक नया कीर्तिमान बनाया है । इतिहास साक्षी है कि हर रामनवमी के जुलूस पर शांति प्रिय समुदाय द्वारा "पत्थर वर्षा" की रस्म अदायगी की जाती रही है । कहते हैं न कि यज्ञ में राक्षस लोग व्यवधान डालते ही डालते हैं । यह परंपरा पिछले 1300 वर्षों से चली आ रही है । इसे रस्म की तरह से निभा रहे हैं ये लोग ।


लेकिन इस बार यह रस्म अदायगी नहीं हुई । कहीं से एक भी पत्थर चलने की आवाज नहीं आई । यह एक आश्चर्यजनक घटना थी । बिना पत्थरबाजी के रामनवमी का जुलूस कैसे निकल गया ? इसने मेरे जैसे "लिखाड़" को भी सोचने पर मजबूर कर दिया ।


मैं तो सोचे बैठा था कि चाहे और कहीं पर भी पत्थर वर्षा हो या ना हो लेकिन पश्चिमी बंगाल में तो होगी ही क्योंकि यहां तो "दीदी" की "सेना" ऐसे पुनीत कार्यों के लिए हमेशा तैयार रहती है । अरे भाई, पत्थरबाजी के लिए नहीं , हिन्दुओं को उनकी औकात दिखाने के लिए । तभी तो बंगाल चुनावों के बाद दीदी की सेना के द्वारा सरेआम हिन्दुओं पर हमले होते हैं । उनका नरसंहार होता है । उनकी मां बहनों के साथ बलात्कार होता है और आगजनी कर के उन्हें पश्चिम बंगाल छोड़ने के लिए विवश किया जाता है । यह सब सुप्रीम कोर्ट आंखें बंद करके धृतराष्ट्र की तरह अंधा बहरा बनकर देखता रहता है ।


और तो और , इस बार तो महाराष्ट्र में भी पत्थरबाजी की घटनाएं नहीं हुईं जहां "औरंगजेब प्रेमी" बहुतायत में रहते हैं । लगता है कि अब दाऊद का संरक्षण मिलना बंद हो गया है इन बाबर के वंशजों को ।


तेलंगाना और कर्नाटक भी अछूते ही रहे हैं जबकि वहां पर तो इनके आका ही बैठे हैं सत्ता में । लेकिन वे शायद सत्ता की मलाई चाटने में ज्यादा व्यस्त हैं इसलिए पत्थरबाजी पर उनका ध्यान नहीं गया होगा ।


सनातन को मलेरिया, डेंगू और न जाने क्या क्या बताने वाले उस तमिलनाडु से भी ऐसी कोई खबर नहीं आई । और तो और उस केरल से भी ऐसी कोई खबर नहीं आई जहां से एक युवराज और एक राजकुमारी को चुनकर संसद में भेजा है ।


क्या यह प्रभु श्रीराम का चमत्कार हैं ? या फिर वक्फ संशोधन बिल पास होने से समुदाय विशेष में फैली घोर हताशा ? या फिर शांति प्रिय समुदाय को अहसास हो गया है कि उसके दिन अब लद गए हैं ।


उसने अब तक जो दादागिरी करनी थी, कर ली । अब उसके वोट के बिना भी सत्ता मिल सकती है और चल भी सकती है । बेचारों का भ्रम ही टूट गया है । अब तक स्वप्न में ही जिंदा रह रहे थे ये शांतिदूत ।


पर इससे भी बड़ा एक और चमत्कार देखने को मिला था कल । अयोध्या में भगवान श्रीराम का जब से मंदिर बना है तब से इंडी गैंग का एक भी प्रमुख नेता भगवान श्रीराम के दर्शन करने नहीं गया था जबकि वही नेता "इफ्तार पार्टी" में जाली टोपी पहन कर बड़े मजे से मिठाइयां उड़ा रहे थे । इन्हें "प्रसाद" सांप्रदायिक लगता है लेकिन ईद की सिंवइयां धर्मनिरपेक्ष । लेकिन जनता चुपचाप सब देख रही है । समय पर वह हिसाब भी कर रही है जैसा हरियाणा वालों ने जलेबी की फैक्ट्री खोलकर किया था और महाराष्ट्र वालों ने "शिया सुन्नी सेना" को घर बैठाकर ।


लोकसभा चुनाव में भ्रम फैलाकर , आरक्षण हटाने की अफवाह उड़ाकर खानदानी युवराज और यदमुल्ले जैसे लोग उत्तर प्रदेश में लोगों को बरगलाने में सफल हो गए । यदमुल्ले को 37 और युवराज को 6 सीट मिल गईं । इस छोटी सी सफलता से ये दोनों नेता बौरा गए और इन्होने संसद में नंगा नाचना शुरू कर दिया । यदमुल्ले ने तो भगवान श्रीराम का अपमान करने के लिए एक सांसद को ही "अयोध्या नरेश" घोषित कर दिया । यह यदमुल्ला भूल गया था कि अयोध्या के नरेश तो केवल भगवान श्रीराम ही हैं । लेकिन छोटे लोग छोटी जीत को पचा नहीं पाते हैं और जगह जगह वमन कर गंदगी फैलाते रहते हैं ।


हिन्दुओं को चिढ़ाने के लिए फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद को इस यदमुल्ले ने सिर पर बैठा लिया और इसे अयोध्या नरेश बताकर लोकसभा में अपने पास बैठाना शुरू कर दिया । इसे तुरुप के इक्के की तरह अपनी जेब में रखकर बौराए बौराए घूमते रहे ।


पर जैसा कि मैंने कहा है , जनता सब देखती सुनती रहती है । लोगों को अपनी भूल का अहसास हुआ और उत्तर प्रदेश के उपचुनावों में जनता ने यदमुल्ले का पूर्ण सफाया कर दिया । उस तथाकथित अयोध्या नरेश को उसके घर (मिल्कीपुर) में ही बुरी तरह चित्त कर दिया । बेचारा अवधेश प्रसाद कैमरों के आगे खूब रोया लेकिन जनता नहीं पिघली सो नहीं पिघली ।


अब अवधेश प्रसाद को जमीनी सच्चाई पता चल चुकी थी ।‌ उसे ज्ञात हो गया कि झूठ की नाव ज्यादा दूर तक साथ नहीं देती है । अब उसे भी समझ में आ गया कि अयोध्या के नरेश तो भगवान श्रीराम ही रहेंगे । उसे तो यदमुल्ले ने एक टूल किट की तरह यूज किया था बस !


इसे भगवान श्रीराम का चमत्कार ही समझा जाएगा कि जो तथाकथित अयोध्या नरेश भगवान श्रीराम के दरबार में आज तक उपस्थित नहीं हुए वे कल रामनवमी के दिन पूरे परिवार के साथ भगवान कोशलाधीश के चरणों में लोटते हुए दिखाई दिए ।


दृश्य बड़ा अद्भुत था । लोगों ने अपने कैमरों में कैद कर लिया था । सोशल मीडिया पर वह वीडियो चलने लगा था ।


अंत भला तो सब भला ! चलो, इसे तो अक्ल आ गई पर बाकी यदमुल्लों, रावणों, नटवर लालों, मलेरिया डेंगू वाले क्रिप्टो क्रिश्चियनों को कब आएगी, यह देखने वाली बात होगी ।


हम तो इतना ही कहेंगे कि


रघुपति राघव राजा राम ।


पतित पावन सीताराम ।


खेंचो प्रभु जी इनके कान


सबको सन्मति दो भगवान


श्री हरि



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