आज की कहानी:- क्रोध ️


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एक सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा। वहाँ एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे।


संन्यासी यह देख तुरंत पलटा और अपने शिष्यों से पूछा; ”क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं ?’


शिष्य कुछ देर सोचते रहे, एक ने उत्तर दिया, ” क्योंकि हम क्रोध में शांति खो देते हैं।"


”पर जब दूसरा व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है तो भला उस पर चिल्लाने की क्या ज़रुरत है!! जो कहना है, वो आप धीमी आवाज़ में भी तो कह सकते हैं", सन्यासी ने पुनः प्रश्न किया।


कुछ और शिष्यों ने भी उत्तर देने का प्रयास किया पर बाकी लोग संतुष्ट नहीं हुए।


अंततः सन्यासी ने समझाया।। “जब दो लोग आपस में नाराज होते हैं तो उनके दिल एक दूसरे से बहुत दूर हो जाते हैं।


और इस अवस्था में वे एक दूसरे को बिना चिल्लाये नहीं सुन सकते…। वे जितना अधिक क्रोधित होंगे, उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक हो जाएगी और उन्हें उतनी ही ज़ोर से चिल्लाना पड़ेगा।


क्या होता है जब दो लोग प्रेम में होते हैं ? तब वे चिल्लाते नहीं बल्कि धीरे-धीरे बात करते हैं, क्योंकि उनके दिल करीब होते हैं, उनके बीच की दूरी नाम मात्र की रह जाती है।


सन्यासी ने बोलना जारी रखा,” और जब वे एक दूसरे को हद से भी अधिक चाहने लगते हैं तो क्या होता है ? तब वे बोलते भी नहीं, वे सिर्फ एक दूसरे की तरफ देखते हैं और सामने वाले की बात समझ जाते हैं।”


1. क्रोध दूरी बढ़ाता है –

 जब हम गुस्से में होते हैं, तो हमारे दिल एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं, इसलिए हमें अपनी बात चिल्लाकर कहनी पड़ती है।


2. प्रेम और समझदारी से संवाद करें –

 प्रेम और शांति के समय लोग धीरे-धीरे बात करते हैं, क्योंकि उनके दिल पास होते हैं और वे बिना ऊँची आवाज़ किए एक-दूसरे को समझ सकते हैं।


3. शांत मन से समस्याओं का समाधान करें –

 किसी भी रिश्ते में, गुस्से में चिल्लाने की बजाय संयम और धैर्य से बात करने से ही समाधान निकलेगा।


4. गहरी समझ से मजबूत संबंध बनते हैं – 

जब दो लोग एक-दूसरे को गहराई से समझने लगते हैं, तो बिना बोले भी उनकी भावनाएँ व्यक्त हो जाती हैं।

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5. क्रोध में शब्दों पर नियंत्रण रखें – 

क्रोध में बोले गए कठोर शब्द रिश्तों को तोड़ सकते हैं, इसलिए संयम रखना आवश्यक है।


यदि हमें अपने रिश्तों को मजबूत और मधुर बनाना है, तो हमें गुस्से में चिल्लाने की बजाय धैर्य और प्रेम से संवाद करना चाहिए। 

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