माने ना मेरा दिल दीवाना...
इधर लोकसभा में वक्फ बिल पर जैसे ही वोटिंग होनी शुरू हुई, उधर वायनाड़ की सड़कों पर जनता चांद तारे वाला हरा झंडा हाथ में लेकर निकल पड़ी । सब लोग विक्षिप्त होकर घूम रहे थे और सबकी जुबां पर एक ही तराना था
"तू कहां ये बता इस कुफ्र की रात में
माने ना मेरा दिल दीवाना
हाय रे हाय, माने ना मेरा दिल दीवाना"
लोगों की आंखें से मोती बरस रहे थे । होंठों से तराने फूट रहे थे । दिल से आह निकल रहीं थीं । लोग पागलों की तरह दौड़ रहे थे । ऐसा लग रहा था कि जैसे वे किसी को ढूंढ रहे थे ।
उनके इस विक्षिप्त व्यवहार से मैं चौंका नहीं क्योंकि वायनाड़ के लोग ऐसा व्यवहार कोई पहली बार नहीं कर रहे थे , वरन् ये लोग सन् 1947 से पहले से ऐसा व्यवहार करते आ रहे हैं । क्यों , भूल गए क्या ? क्या भीड़ू ? बड़ी जल्दी भूल जाते हैं आप लोग !
अरे भाई, तब उस समय की मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग की थी ना तो क्या वायनाड़ वालों को पाकिस्तान मिल गया था ? नहीं ना ! ऐसे में उन बेचारों के दिलों पर क्या बीती होगी , किसी ने कभी सोचा है ?
वो एक गाना है ना कि
"मन तरपत हरि दर्शन को आज"
उसी तर्ज पर इन लोगों का मन "पाकिस्तान" के लिए तड़प रहा है लेकिन क्या करें ? पाकिस्तान जाकर भूखे नहीं मरना चाहते हैं और भारत को अपना मान नहीं सकते हैं । ऐसे में इनका दिल सुलग रहा है । बेचारे तब से सुलग रहे हैं । वो एक गाना है ना
"ओ मेरे दिल के चैन
चैन आए मेरे दिल को दुआ कीजिए" ।
अब इनके दिल का चैन तो पाकिस्तान है और वह इन्हें मिला नहीं तो फिर इनके दिल को चैन कैसे आए ?
लेकिन हरदम तो नहीं सुलगे रह सकते हैं ना ! इसलिए इन्होंने एक शॉर्टकट निकाल लिया । पाकिस्तान नहीं जा सकते हैं तो कोई बात नहीं , वायनाड़ को तो पाकिस्तान बना सकते हैं ना ? और बस, यही काम किया इन्होंने । तब से ये लोग वायनाड़ में रहकर पाकिस्तान में रहने का आनंद महसूस कर रहे हैं ।
इसके लिए इन्होंने मुस्लिम लीग का नाम बदल कर इंडियन मुस्लिम लीग रखकर भारत में छोटे छोटे पाकिस्तान बनाने का जिम्मा ले रखा है ।
सन् 1947 से ये लोग "गजवा ए हिंद" का ख्वाब पाल रहे हैं और नित्य निरंतर इसके लिए अथक प्रयास भी कर रहे हैं । इसके लिए ये लोग "लव जिहाद" और आई एस आई एस तक ज्वाइन कर रहे हैं । वो एक कहावत है ना कि
लगे रहो किनारे से , कभी तो लहर आएगी
तो , हाजरात उसी लहर का इंतजार कर रहे हैं अभी तक ।
इसी बीच एक गजब का वाकया हो गया । 5-6 साल पहले एक खानदानी युवराज को उत्तर प्रदेश की जनता ने लतिया कर खदेड़ने का मन बना लिया । तो वे क्या करते ? बेचारे भागे भागे दक्षिण दिशा की ओर आए ।
इतिहास साक्षी है कि जब जब इस "खानदान" को उत्तर ने लात मारी है तब तब उसे दक्षिण ने न केवल शरण दी है बल्कि उसे संजीवनी भी प्रदान की है । अब आंध्र प्रदेश में "मेंडक" लोकसभा क्षेत्र को देख लो या कर्नाटक में "चिकमगलूर" । उत्तर ने जब जब नकारा दक्षिण ने तब दिया सहारा । ये दक्षिण वाले ही इनके "पालन हारे , तारन हारे, निर्गुण और न्यारे" बने हुए हैं ।
ऐसे में सन् 2019 में वायनाड़ वालों ने उस खानदानी युवराज का तहे दिल से स्वागत करते हुए कहा
"आओ युवराज , हम उठाएंगे तुम्हारी खड़ाऊं" ।
और इन हरी चादर में लिपटे हुए लोगों ने युवराज की खड़ाऊं उठाकर अपने सिर पर रख ली । युवराज भी गदगद हो गए । युवराज को विश्वास हो गया कि आखिर देश में कुछ "बेवकूफ" तो अभी भी रहते ही हैं उसे झेलने के लिए । वायनाड के स्वागत को देखकर मन प्रसन्न हो गया था युवराज का ।
फिर क्या हुआ ? सभी लोग जानते हैं । धूम धड़ाके के साथ राजतिलक हुआ था युवराज का ।
ओह सॉरी ! धूम धड़ाके के साथ नहीं , चौराहे पर गाय काटकर , उसका मांस पकाकर और उसे खाकर "गजवा ए हिंद" का नारा बुलंद किया गया था । ऐसे राजतिलक किया गया था ।
कम ही लोगों को पता है कि युवराज को न तो सनातन से कोई लेना देना है और न ही हरी चादर से । क्योंकि उसने तो अपने गले में क्रॉस का चिन्ह लटका रखा है । अब ये अलग बात है कि वह कपड़ों के नीचे छुप गया है और दुनिया दिखाने के लिए कोट के ऊपर जनेऊ पहन लिया और सिर पर जालीदार टोपी पहन ली ।
पर आंख के अंधों और अक्ल के दुश्मनों को वह दिखाई नहीं देता है । इसलिए कोई उसे जनेऊधारी समझ लेता है तो कोई फिरोज खान का वारिस । पर हकीकत तो वेटिकन का पोप और जीसस क्राइस्ट जानते हैं ना !
पिछले 6 महीने से आबोहवा में "वक्फ" की महक बसी हुई है । अलोकतांत्रिक , तानाशाह , संविधान विरोधी , सांप्रदायिक , अडानी अंबानी की जेबें भरने वाली , मज़हबी विरोधी सरकार बेचारे गरीब, अनाथ, असहाय, मजलूम वक्फ के पीछे पड़ीं हुई है । उसका "चीरहरण" करने पर आमादा है । यद्यपि समस्त तथाकथित सेक्युलर, लिबरल, जेहादी, अराजक, नक्सलवादी, माओवादी, खैराती , चाटुकार, ईकोसिस्टम और कोर्ट फिक्सर सब लोग इस तानाशाह को येन केन प्रकारेण रोकने में लगे रहे । चाहे इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट को भी हथियार बनाया लेकिन सब लोग मिलकर भी एक तानाशाह को रोकने में कामयाब नहीं हो पाए । सरकार ने तय कर लिया था कि वक्फ रूपी "आवारा सांड" को इस बार "बधिया" करना ही है ।
लेकिन वायनाड वाले बड़े खुश थे । उनके पास खुश होने का कारण भी था । एक युवराज की खड़ाऊं उठाई थीं आखिर उन्होंने । और अब वे एक "प्रिंसेस" की पालकी ढो रहे हैं । राजमाता , युवराज और प्रिंसेस के होते हुए एक चाय वाला इतनी हिम्मत कर सकता है क्या कि वह वक्फ जैसे आवारा सांड को वश में कर ले ? नहीं ना ! इसलिए बेचारे वायनाड़ वाले गफलत में फंस कर रह गए ।
वो रात , जब लोकसभा में वक्फ बिल पर कुछ शेर दहाड़ रहे थे , कुछ बिल्लियां म्याऊं म्याऊं कर रहीं थीं , कुछ लोग भोंक रहे और कुछ ढेंचू ढेंचू कर रहे थे , वहीं पर वायनाड के लोग टेलीविजन पर आंखें फाड़ फाड़ कर अपनी राजमाता , युवराज और प्रिंसेस को ढू़ढ रहे थे ।
मगर उन्हें वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे थे । जब कोई दुख की घड़ी आती है तो लोग ऐसे समय में अपने "आकाओं" की ओर टकटकी लगाकर देखते हैं । लेकिन हाय रे अल्लाह ! जिन्हें सिर आंखों पर बैठाकर रखा था , आज वे न जाने किस गली में अटक कर रह गए थे ।
जब तीनों के दर्शन नहीं हुए तो बेचारे वायनाड़ वालों का दिल टूट गया और वे विक्षिप्त होकर वायनाड़ की सड़कों पर उन्हें ढूंढने निकल पड़े । बस , चारों ओर से एक ही आवाज आ रही थी
तू कहां , ये बता इस कुफ्र की रात में
माने ना मेरा दिल दीवाना
हाय रे हाय , माने ना मेरा दिल दीवाना
बाइ द वे, अगर किसी को वह खानदान कहीं नजर आ जाए तो इसकी सूचना बेचारे वायनाड वालों को जरूर दे देना । इससे उन्हें थोड़ी तसल्ली मिल जाएगी नहीं तो वे बेचारे विक्षिप्त ही हो जाएंगे ।
हमें बहुत सुहानुभूति है बेचारे वायनाड़ वालों से ।
श्री हरि

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
The main objective of our Website or blog jaishreekrishna1298.blogspot.com is to provide educative, entertaining and informative stories and information in Hindi language to the people . Through jaishreekrishna1298.blogspot.com we want to provide information through internet so that people can get more and more information about these stories and know more about them in India and the world. Through this website, we are trying to reach people with animal stories, grandmother's stories, Panchatantra, Akbar Birbal stories, Tenaliram stories, religious stories, stories of great men and entertainment stories. The purpose of these stories is not to hurt the feelings of people of any caste, religion, gender, community or country.If the characters or events in our stories are similar from another person or event then it can be a coincidence.
Information is updated from time to time in our website.