सिकंदर या छछूंदर
कहते हैं कि आदमी वह जो सही समय पर सही निर्णय ले ले । लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि जो सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाता उसे क्या कहते हैं ? ये अब आप ही तय कीजिए कि उन्हें क्या कहा जाए ?
जब एक 60 साल का "दादू" अपनी पोती की उम्र वाली लड़की से किसी मूवी में इश्क के पेंच लड़ाते नजर आए तो उसे क्या कहेंगे ? जब एक 55 साल का बूढ़ा आदमी संसद में किसी लड़की का गाल खींचता हुआ नजर आए , तो उसे क्या कहेंगे ? अभी IPL के मैच देखकर लोग धोनी को भी कहने लगे हैं कि
"दद्दू, अब तो हम पर रहम करो और क्रिकेट को छोड़ दो" ।
मगर मजाल है जो ये लोग किसी की सुनें । अरे भाई , इनकी चमचा मंडली इन्हें सुनने दे ना ? वे लोग इन्हें चने के झाड़ पर चढ़ाए रखते हैं और खुद मलाई उड़ाते रहते हैं । तभी तो ये लोग हकीकत से सैकड़ों कोस दूर रहते हैं ।
यही हाल हो रहा है बॉलीवुड के एक भाईजान का । कहने को तो वह "नायक" कहलाता है लेकिन काम सारे ही "खलनायकों" वाले करता है । अब चाहे फुटपाथ पर सोते हुए गरीबों पर गाड़ी चढ़ाकर उन्हें "जन्नत" में 72 हूरों के पास पहुंचाने का मामला हो या जोधपुर में काले हरिणों के शिकार का मामला हो ।
जब आदमी के पास पैसा , पहुंच, प्रतिष्ठा और कोर्ट फिक्सर वकील हो तो न्याय की परिभाषाएं भी बदल जाती है । हत्या एक्सीडेंट बन जाती है । भ्रष्टाचार के बोरों में भरे अधजले नोट कड़ी सुरक्षा वाले जज के घर में पाए जाने पर भी वे "अज्ञात लोगों" के हो जाते हैं । काला हिरण "भाईजान" के स्टारडम से जल कर खुद को गोली मार लेता है ।
और तो और , बॉलीवुड पर राज करने की किसी के मन में जब ख्वाहिश पैदा हो जाती है तब वह "डी कंपनी" के मोहरे किसी "बाबा" की पूंछ पकड़ कर पूरे बॉलीवुड पर राज कर जाता है ।
जब से बॉलीवुड का गॉडफादर "बाबा सिद्दीकी" अल्लाह मियां को प्यारा हो गया है तब से बॉलीवुड की रौनक ही खत्म हो गई है । अब न वो "शाही इफ्तार पार्टी" होती हैं और न ही मुसलमान हीरो और हिन्दू हीरोइन वाली फिल्में बनती हैं । सब कुछ बदला बदला सा नजर आ रहा है ।
जावेद चीच्चा और सलीम खान जिन्होंने बॉलीवुड को उर्दू वुड बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और इसमें उनका भरपूर साथ दिया था एक तथाकथित महानायक ने । भगवान को गाली देने का सिलसिला इन्हीं तीनों ने शुरू किया था और 786 नंबर के बिल्ले की इबादत करनी शुरू कर दी थी । भगवान के विरुद्ध एक फर्जी "सांई बाबा" पुजा दिया था इन्होंने । भोली भाली जनता इनके मकड़जाल में फंस कर अपने ही भगवानों को गालियां देने लग गई । इनकी दुकान चल निकली ।
बॉलीवुड पर राज करने के लिए सारे "खान" एक हो गए । और जब सारे "खान" मिलकर एक साथ "मुजरा" करने लगते हैं तब बड़े बड़े कपूर खानदान , चौपड़ा परिवार जैसे लोग इनके तलवे चाटने लग जाते हैं । फिर कोई "छक्का" इनके पाप धोने के लिए "माई नेम इज खान" जैसी मूवी बनाता है । कोई सूपर्ण खां भी इनके सामने लहंगा उठा उठा कर नितंब मटकाने लगती है ।
लेकिन अब भाईजान के दिन लद गए लगते हैं । तभी तो लोगों ने "सिकंदर" को "छछूंदर" बना डाला है ।
वैसे भी भाईजान की मूवी में कहानी की बात कोई पागल ही कर सकता है । समझदारों को तो पता है कि भाईजान की मूवी में कहानी उसी तरह गायब होती है जिस तरह स्टैंड अप कॉमेडियन के शो में कॉमेडी ।
ऐसा नहीं है कि ये बात भाईजान नहीं जानता है , उसे सब पता है लेकिन वह खुद को अभी भी आसमान पर बैठा हुआ मानता है । उसे वहां से सब कुछ अच्छा ही अच्छा दिखता है लेकिन हकीकत कुछ और ही होती है ।
यद्यपि लोगों ने तीनों "खानों" को अपने तरीके से चेता दिया था लेकिन जिनके सिर पर स्टारडम का भूत सवार हो , वे कैसे मानें ?
जब "पठान" मूवी पिटने लगी तो "छक्के" जैसे चमचे उसे सुपर डुपर हिट साबित करने में जुट गए । उसने पूरा का पूरा हॉल बुक करवा कर प्रचारित कर दिया कि मूवी हाउसफुल जा रही है । वो तो तब पता चला जब यह "छक्का" दीवालिया घोषित हो गया और इसने अपनी "कंपनी" के आधे शेयर बेच दिए ।
यही हाल "लाल सिंह चढ्ढा" का भी हुआ । जनता ने लाल सिंह की चढ्ढी फाड़ दी लेकिन भाई फिर भी प्राकृतिक अवस्था में ही मुजरा करता नजर आया ।
इन तीनों खानों ने एक बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार सुशांत सिंह राजपूत की बलि ले ली । बहुमुखी प्रतिभा के एक और धनी सोनू निगम के कैरियर को चौपट कर दिया । अरिजीत सिंह की भी "मोकरी" बनाने में इन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी । अब इनके पापों का घड़ा भर चुका है । अब जनता इन कागज़ी सिकंदरों को इनकी असली औकात दिखाकर इन्हें "छछूंदर" बना रही है ।
इब्तिदा ए इश्क है , रोता है क्या
आगे आगे देखिए , होता है क्या !
श्री हरि

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
The main objective of our Website or blog jaishreekrishna1298.blogspot.com is to provide educative, entertaining and informative stories and information in Hindi language to the people . Through jaishreekrishna1298.blogspot.com we want to provide information through internet so that people can get more and more information about these stories and know more about them in India and the world. Through this website, we are trying to reach people with animal stories, grandmother's stories, Panchatantra, Akbar Birbal stories, Tenaliram stories, religious stories, stories of great men and entertainment stories. The purpose of these stories is not to hurt the feelings of people of any caste, religion, gender, community or country.If the characters or events in our stories are similar from another person or event then it can be a coincidence.
Information is updated from time to time in our website.