हिन्दू 120 करोड़ है मगर वफ्फ बिल के पक्ष मे.....

 

वक्फ बोर्ड की हिमाकत तो देखिए,

हिन्दू 120 करोड़ है मगर वफ्फ बिल के पक्ष मे 288 वोट पड़े जबकि मुसलमान महज 20 करोड़ की आबादी मे 232 वोट ले गए।


अयोध्या के राम मंदिर की लड़ाई राम लला विराजमान बनाम सुन्नी वफ्फ बोर्ड थी लेकिन खुद अयोध्या का वोट वफ्फ के लिये पड़ा।


जिस राजस्थान मे महिलाओ को इस्लाम से बचने के लिये जौहर करना पड़ा उसी राजस्थान के 11 सांसद वफ्फ के पक्ष मे थे।



विजयनगर साम्राज्य को जलाने वाली मुस्लिम सल्तनतो को 9 वोट उसी विजयनगर (कर्नाटक) से मिल गए।


वो सब भी छोड़िए जिन पंजाब और बंगाल को इस्लाम के नाम पर जलाकर तोड़ दिया गया उनकी जनता तक के प्रतिनिधियों ने वफ्फ के लिये वोट दिया।


ये दर्शाने के लिये पर्याप्त है कि समाज मे एकता कितनी आवश्यक है। हिन्दुओ मे कट्टरता आयी है मगर परिपक्व होने मे समय है, अब समय गया ज़ब आप उम्मीदवार देखकर वोट करें।


अब व्यक्ति का मूल्य ही नहीं है, ज्योतिरादित्य सिंधिया यदि 6 साल पहले वोट करते तो वफ्फ बोर्ड बचाने के लिये वोट करते मगर आज उन्होंने उसके खिलाफ वोट दिया है।


आज व्यक्तिगत विचार नहीं...


अपितु पार्टी के हिसाब से काम करना पड़ता है।


कांग्रेस के भी कई सांसद होंगे जो वफ्फ के खिलाफ होंगे लेकिन राजमाता क्या चाहती है वोट उसके अनुरूप होगा।


इसलिए ये जो आप बहाने बनाते है कि अमित शाह ने ऐसे टिकट बांटे वैसे टिकट बांटे ये निरर्थक है।


यदि उम्मीदवार देखकर वोट पड़ते तो बीजेपी का गुजरात और मध्यप्रदेश मे सूपड़ा साफ हो जाता, लेकिन जनता ने सिर्फ केंद्रीय नेतृत्व को ध्यान मे रखकर वोट दिया....


और मध्य प्रदेश वासियों को गर्व करना चाहिए क्योंकि आपके गृह राज्य (मध्यप्रदेश) का हर एक वोट वफ्फ के खिलाफ गया।


फिर भी यदि आपको आंतरिक राजनीति झेलकर वोट देना ही है तो निर्दलियो को जीता दीजिये या नोटा दे दीजिये,


21वी सदी मे ज़ब आप अखिलेश यादव, ममता बनर्जी के लिये वोट करके कहते है कि आपने वर्ल्ड लीडर को सबक सीखा दिया तो ये महज नादानी है।


इस बिल का असली ताज़ गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल, दिल्ली, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश और बिहार के लोगो के सिर बैठता है।


90% से ज्यादा लोकसभा उम्मीदवारो को हम नापसंद करते थे, इनके राज्य मे तो कोई योगी भी नहीं था लेकिन ज़ब बात धर्म की आयी तो आपने योगीराज से तो लाख गुना बेहतर सिद्ध हुए।


मतलब यूपी वाले योगी को पाकर भी भाजपा की कदर नहीं कर सके क्योंकि अब यहां दंगे फसाद बंद हो गये हैं तो हमारे यूपी के लोग आंखों पर चादर डाल कर लोकसभा चुनाव में सो गए थे।


जाग जाओ 27 चुनाव से पहले यूपी वालों, क्योंकि योगी जैसा दूसरा लीडर इस सदी में जन्म नहीं लेगा।


लोकसभा चुनाव में यूपी से भाजपा कमजोर हुई, साथ ही इससे ये भी सिद्ध हो गया कि लोकतंत्र मे नेता नहीं जनता ही असली राजा है, बस आवश्यकता है तो एक समूह के रूप मे सोचने और कार्य करने की।


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