आजकल लोग हिंदू त्यौहारों को निशाना क्यों बना रहें हैं ?

 इस सवाल का जवाब देने से पहले मैं आपको अपने प्रदेश बिहार की एक भोजपुरी की कहावत के बारे में बताना चाहूंगा।


सिधवा के मुंह कुकुर चाटे - इसका अर्थ यह होता है कि जो अत्यधिक सीधा होता है उसका मुंह कुत्ता भी चाट लेता है।


चाणक्य नीति का भी एक अति महत्वपूर्ण श्लोक है जो बिल्कुल सत्य है।


चाणक्य नीति का श्लोक

नात्यन्तं सरलेन भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम्।छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः।।


जिन लोगों का स्वभाव बहुत ज्यादा सीधा-साधा है, उन्हें ऐसे नहीं रहना चाहिए, यह उनके के लिए अच्छा नहीं है। जंगल में हम देख सकते हैं, जो भी पेड़ सीधे होते हैं, सबसे पहले काटने के लिए उन्हें ही चुना जाता है। ऐसे लोगों को कमजोर माना जाता है एवं बार-बार स्वार्थ के लिए इनको प्रताड़ित किया जाता है तथा इन के मूलभूत सिद्धांतों को भी क्षति पहुंचाया जाता है।


हिंदू धर्म एक ऐसा धर्म है जोकि शांति सद्भावना और भाईचारे में दूसरे किसी धर्म से ज्यादा विश्वास रखता है ।यह धर्म ऐसा है जिसे अपने प्रचार प्रसार के लिए बड़े योद्धाओं या शासकों की आवश्यकता नहीं पड़ी ।इसका मूलभूत वैज्ञानिक आधार ही इतना सुंदर था कि लोग इसका अनुसरण करते थे। और इसी कमजोरी का फायदा कुछ धर्म विशेष द्वारा उठाया जाने लगा जिसके तहत हिंदू तीज त्यौहारों को टारगेट किया गया उन्हें अंधविश्वास बताया गया यहां तक कि उसे ना करने की भी हिदायत दी गई।


हिंदू धर्म का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि हिंदुत्व के नाम पर कभी भी हिंदू एक नहीं होते लेकिन बाकी सारे धर्म वाले एक हो जाते हैं। हिंदू धर्म में कुछ ऐसे विषैले सपोले भी हैं जो नाम से तो हिंदू जान पड़ते हैं मगर कर्म और भाषा से लगता है कि वह हिंदू धर्म को ही अभिशाप मानते हैं। ऐसे लोग भी मिल जाएंगे जो अपने आप को बुद्धिजीवी होने का दावा करते हैं और हिंदू व्रत त्यौहार को निशाना बनाकर इसके प्रति दुष्प्रचार करते हैं। पर दूसरे धर्मों के मामले में इनकी बोलती भीगी बिल्ली की तरह बंद हो जाती है और तो और यह उनका बचाव करते नजर आते हैं और कहते हैं यह उसका धार्मिक मामला है ।


हिंदू धर्म का अत्यधिक प्रेम , सभी धर्मों के साथ लेकर चलने वाली नीति, सब को अपना भाई समझने वाली नीति ,एवं सबको गले लगाने वाली नीति ही आज के जमाने में हिंदू धर्म के पतन का कारण बनते जा रही है क्योंकि हिंदू यह सोचता है कि हम ऐसा करके अपनी अच्छाई उसके सामने रख रहे हैं जिससे वह हमारे बारे में कुछ गलत ना सोचे पर सामने वाला हिंदू भाई को बेवकूफ समझता है और उसकी सीधे पन का फायदा उठाता है। मजाल है जो कोई दूसरे धर्म के किसी व्रत त्यौहार में किसी को बोल सके उसकी खटिया खड़ी कर दी जाएगी । लेकिन हिंदू चुपचाप सुनता रहता है नहीं तो जिस दिन हिंदुओं ने भी जुबान खींचना शुरू कर दिया उस दिन इनकी भी दिमाग ठिकाने आ जाएगी। हो सकता है कि ऐसे बहुत से सेकुलर लोग मेरी इस उत्तर से सहमत ना हो लेकिन यही सत्य है और उनका दिल भी इस बात को जानता है।

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