मैड बुचर"
1930 का दशक अमेरिका के लिए मुश्किल वक्त था। ग्रेट डिप्रेशन ने लाखों लोगों को बेरोजगार कर दिया था, और शहरों में गरीबी और अपराध बढ़ गया था।
क्लीवलैंड, ओहियो, एक औद्योगिक शहर था, जो इस संकट से बुरी तरह प्रभावित था। यहाँ की किंग्सबरी रन नाम की जगह—एक गंदा, दलदली इलाका, जहाँ रेल की पटरियाँ और झोपड़ियाँ थीं—शहर का सबसे गरीब और खतरनाक हिस्सा था।
यहाँ बेघर लोग, मजदूर, और समाज से ठुकराए हुए इंसान रहते थे। लेकिन 1935 में, यह जगह सिर्फ गरीबी के लिए नहीं, बल्कि एक भयानक हत्यारे के लिए मशहूर हो गई। उसे "क्लीवलैंड टोरसो किलर" या "मैड बुचर" कहा गया।
उसने दर्जनों लोगों को मारा, उनके शरीर के टुकड़े किए, और सिर गायब कर दिए। वह कौन था, यह आज तक कोई नहीं जानता। यह कहानी उस अनसुलझे रहस्य की है, जो क्लीवलैंड की सड़कों पर खून से लिखी गई।
पहली लाश 23 सितंबर, 1935 को मिली। दो किशोर लड़के, जेम्स वैगनर और पीटर कोस्टुरा, किंग्सबरी रन के पास खेल रहे थे। उन्होंने एक ढलान पर कुछ अजीब देखा—एक नग्न पुरुष का धड़, बिना सिर और हाथ-पैर के। पास ही दो पैर पड़े थे, और कुछ दूर एक थैले में उसका सिर मिला।
शरीर साफ-सुथरा कटा हुआ था, जैसे किसी सर्जन ने चाकू चलाया हो। पुलिस ने इसे एडवर्ड एंड्रासी (28) के रूप में पहचाना—एक स्थानीय मजदूर, जो अक्सर किंग्सबरी रन में घूमता था।
उसी दिन, पास में एक और धड़ मिला—एक अज्ञात महिला का, जिसके सिर और हाथ-पैर भी कटे थे। उसकी उम्र 40 के आसपास थी, लेकिन उसकी पहचान कभी नहीं हुई। दोनों शवों में एक बात कॉमन थी—उनके सिर अलग किए गए थे, और कटाई में सर्जिकल सटीकता थी।
पुलिस को लगा कि यह कोई एकल घटना है, शायद नशे या झगड़े का नतीजा। लेकिन जल्द ही दूसरी लाश मिली। 5 जनवरी, 1936 को, एक महिला, फ्लोरेंस पोलिलो (42), का धड़ एक टोकरी में मिला। वह किंग्सबरी रन के पास रहती थी और छोटे-मोटे काम करती थी।
उसका सिर गायब था, और शरीर को कई टुकड़ों में काटा गया था। उसकी त्वचा पर केमिकल के निशान थे, जैसे हत्यारे ने उसे जलाने या छिपाने की कोशिश की हो।
यहाँ से पुलिस को शक हुआ कि यह कोई सनकी हत्यारा है, जो व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा है।हत्याएँ बढ़ती गईं। जून 1936 में, एक और पुरुष का धड़ मिला—उसके सिर के साथ, लेकिन उसकी पहचान नहीं हुई।
उसकी पीठ पर टैटू थे, इसलिए उसे "टैटूड मैन" कहा गया। जुलाई में, एक किशोरी का सिर रहित शरीर मिला। सितंबर में, एक और अज्ञात पुरुष का धड़। हर बार, हत्यारा एक पैटर्न फॉलो करता था—सिर काटना, शरीर के टुकड़े करना, और अक्सर सिर को पास में छोड़ देना या गायब कर देना।
कुछ शवों को नदी में बहाया गया, कुछ को जंगल में फेंका गया। 1937 तक, क्लीवलैंड में दहशत फैल गई। लोग इसे "मैड बुचर" कहने लगे, और अखबारों ने इसे सनसनी बना दिया।हत्याओं की संख्या बढ़कर 12 हो गई—कुछ का अनुमान है कि यह 20 तक भी हो सकती है।
सबसे भयानक मामला 6 अगस्त, 1938 का था। एक मजदूर ने किंग्सबरी रन के पास एक झाड़ी में हड्डियाँ देखीं। पुलिस ने खुदाई की, तो एक महिला का धड़ और उसका सिर एक डब्बे में मिला।
पास में एक पुरुष का टुकड़ा हुआ शरीर था। दोनों की पहचान नहीं हुई। हत्यारा अब और साहसी हो गया था—वह शवों को खुलेआम छोड़ रहा था, जैसे पुलिस को चुनौती दे रहा हो।क्लीवलैंड पुलिस उस समय सक्षम थी, लेकिन तकनीक सीमित थी।
कोई डीएनए नहीं, कोई फिंगरप्रिंट डेटाबेस नहीं। फिर भी, जाँच की कमान संभाली एलियट नेस ने—वही नेस, जो शिकागो में गैंगस्टर अल कैपोन को पकड़ने के लिए मशहूर था। नेस अब क्लीवलैंड का सेफ्टी डायरेक्टर था।
उसने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। सैकड़ों पुलिसवाले किंग्सबरी रन में तैनात किए गए। हर बेघर, मजदूर, और संदिग्ध से पूछताछ हुई। लेकिन हत्यारा हमेशा एक कदम आगे था।कई संदिग्ध सामने आए।
पहला था फ्रैंक डोलेजल, एक 52 साल का मजदूर। वह फ्लोरेंस पोलिलो को जानता था और उसका व्यवहार अजीब था। उसे हिरासत में लिया गया, और उसने कथित तौर पर कबूल किया। लेकिन जेल में उसकी रहस्यमयी मौत हो गई—कुछ ने कहा आत्महत्या, कुछ ने कहा पुलिस ने मारा।
उसकी मौत ने सवाल उठाए—क्या वह सचमुच हत्यारा था, या उसे बलि का बकरा बनाया गया? उसकी कबूलनामे में कई गलतियाँ थीं, जो हत्याओं से मेल नहीं खाती थीं।दूसरा संदिग्ध था डॉ. फ्रांसिस स्वीनी, एक सर्जन, जो किंग्सबरी रन के पास रहता था।
वह शराबी था और मानसिक रूप से अस्थिर था। उसकी पत्नी ने उसे छोड़ दिया था, और वह अक्सर वहाँ घूमता था। हत्याओं की सर्जिकल सटीकता उससे मेल खाती थी। नेस ने उसे गुप्त रूप से पकड़ा और पॉलीग्राफ टेस्ट किया—जो वह फेल हो गया।
लेकिन स्वीनी ने कुछ नहीं कबूला। बाद में उसे एक मेंटल हॉस्पिटल में भेज दिया गया, और हत्याएँ रुक गईं। क्या वह हत्यारा था? कोई ठोस सबूत नहीं मिला, और नेस ने उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया—शायद इसलिए कि स्वीनी एक प्रभावशाली परिवार से था।तीसरा संदिग्ध कोई अज्ञात घुमक्कड़ था।
किंग्सबरी रन में सैकड़ों बेघर लोग रहते थे, जिन्हें "होबो" कहा जाता था। हत्यारा शायद उनमें से एक था, जो भीड़ में गायब हो जाता था। लेकिन उसकी पहचान कभी नहीं हुई। एक और थ्योरी थी कि यह एक से ज्यादा लोग थे—शायद कोई सनकी समूह। लेकिन कोई पैटर्न इसे साबित नहीं करता था।हत्याओं का तरीका दिमाग चकराने वाला था।
हत्यारा सिर क्यों काटता था? कुछ का मानना था कि वह पहचान छिपाना चाहता था। लेकिन कई सिर पास में ही छोड़े गए थे—कभी जले हुए, कभी सड़े हुए। कुछ शवों पर केमिकल थे, जैसे वह उन्हें नष्ट करना चाहता था।
ऑटोप्सी से पता चला कि कई शिकार जिंदा थे, जब उनके सिर काटे गए—यह क्रूरता किसी साधारण हत्यारे की नहीं थी। हत्यारा रात में काम करता था, और किंग्सबरी रन की अंधेरी गलियों में गायब हो जाता था।एक अजीब घटना 1938 में हुई। नेस ने किंग्सबरी रन की झोपड़ियों को जलाने का आदेश दिया, ताकि बेघरों को हटाया जाए और हत्यारा पकड़ा जाए।
यह "होबो रेड" था, जिसमें सैकड़ों लोग बेघर हो गए। इसके बाद हत्याएँ रुक गईं। क्या हत्यारा उनमें था? या वह डरकर भाग गया? यह सवाल अनसुलझा रहा। कुल मिलाकर, 12 पक्की हत्याएँ थीं—7 पुरुष, 5 महिलाएँ।
लेकिन कुछ का अनुमान है कि संख्या 20 या उससे ज्यादा हो सकती है।हत्याओं ने क्लीवलैंड को हिला दिया। लोग डर से घरों में बंद रहने लगे। अखबारों ने इसे "टोरसो किलर" का नाम दिया, और बच्चों को डराने की कहानियाँ बन गईं।
नेस की प्रतिष्ठा दाँव पर लग गई—वह अल कैपोन को पकड़ सकता था, लेकिन इस हत्यारे को नहीं। 1939 के बाद, हत्याएँ बंद हो गईं। क्यों? क्या हत्यारा मर गया? क्या वह जेल में था? या उसने बस रुकने का फैसला किया?20वीं सदी में, कई बार केस को फिर से खोला गया।
1990 के दशक में, पुराने सबूतों की जाँच हुई, लेकिन कुछ नहीं मिला। 2019 में, डीएनए तकनीक से "टैटूड मैन" की पहचान की कोशिश हुई, लेकिन नतीजा अधूरा रहा। किंग्सबरी रन आज एक शांत इलाका है—झोपड़ियाँ गायब हैं, और रेल की पटरियाँ खामोश हैं।
लेकिन वहाँ का इतिहास खून से रंगा है।यह रहस्य दिमाग को चकरा देता है। हत्यारा कौन था—एक सर्जन, एक मजदूर, या कोई सनकी? वह सिर क्यों ले जाता था? क्या वह क्लीवलैंड में ही मरा, या कहीं और चला गया?
क्या वह फ्रांसिस स्वीनी था, जिसे नेस ने छिपाया? या कोई ऐसा शख्स जिसे कोई नहीं जानता? यह कहानी सिर्फ हत्याओं की नहीं—यह उस डर की है, जो इंसान के अंदर छिपे शैतान को दिखाती है। क्लीवलैंड टोरसो मर्डर आज भी अनसुलझा है, और उसका सच शायद हमेशा किंग्सबरी रन की सायों में दफन रहेगा।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
The main objective of our Website or blog jaishreekrishna1298.blogspot.com is to provide educative, entertaining and informative stories and information in Hindi language to the people . Through jaishreekrishna1298.blogspot.com we want to provide information through internet so that people can get more and more information about these stories and know more about them in India and the world. Through this website, we are trying to reach people with animal stories, grandmother's stories, Panchatantra, Akbar Birbal stories, Tenaliram stories, religious stories, stories of great men and entertainment stories. The purpose of these stories is not to hurt the feelings of people of any caste, religion, gender, community or country.If the characters or events in our stories are similar from another person or event then it can be a coincidence.
Information is updated from time to time in our website.