आखिर क्यों सूरजमुखी पुष्प का चेहरा सूर्य की दिशा की ओर ही होता है

 हम में से कई लोगों के मन में यह प्रश्न तो अवश्य ही उठा होगा कि आखिर पुष्प सूरजमुखी अपना मुखरा सूर्य की दिशा में ही किये हुए रहता है ?

 इसके पीछे की वजह क्या है ? आज हम इसी सिलसिले में बात करेंगे कि सूरजमुखी के पुष्प हमेशा सूर्य की दिशा की ओर ही क्यों गति करते रहते हैं ? 

हम आपको बता दें कि सूरजमुखी का पुष्प ठंड की तुलना में गर्मियों में अधिक सक्रिय पाया जाता है। इन पुष्पों का विकास उन क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है, जहां धूप 6 घंटों से अधिक निकली रहती है।

अधिक गर्म तथा तपीश वाली गर्मी में सूरजमुखी के पुष्प बहुत ही तीव्र गति से उगते हैं। सुबह जब सूर्य पूर्व दिशा की ओर से निकलता है, तो इस पुष्प का मुखरा भी पूर्व दिशा की ओर ही होता है।

 धीरे-धीरे जिस प्रकार सूर्य अपनी दिशा परिवर्तित करते हैं, सूरजमुखी भी साथ-साथ इनकी ही दिशा में परिवर्तित होती जाती है। सूरजमुखी के नए पुष्प पुराने पुष्पों की अपेक्षा सूर्य की दिशा में अधिक सम्बोधित होते हैं।

हमारा प्रश्न यह था कि आखिर सूरजमुखी के पुष्प क्यों सदा सूर्य की ही दिशा की ओर गति किया करते हैं? इस प्रश्न के उत्तर में वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा होने का कारण हेलिओ ट्रॉपिज्म है।

 इसी प्रक्रिया के अंतर्गत सूरजमुखी के पुष्प सूर्य की दिशा में ही अपना मुंह मोड़े हुए होते हैं। सूर्य की दिशा के साथ-साथ संध्या के समय इनके फूलों की दिशा भी पश्चिम में ही हो जाती है।

हालांकि रात्रि के समय ये अपनी दिशा वापस से परिवर्तित करके पूर्व की ओर ही कर लेते हैं। तथा अगले दिन वापस से सूर्य के उगने की प्रतीक्षा करते हैं। 

ये प्रक्रिया निरंतर इसी प्रकार नियमित रूप से चलती रहती है। अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर हेलिओ ट्रॉपिज्म कहते किसे है ? यह है क्या ? जिस कारणवश सूरजमुखी के पुष्प सूर्य की दिशा की ओर ही गति करते रहते हैं।

वर्ष 2016 में किये गए एक खोज में इस बात का पता लगा कि जिस प्रकार मानवों के भीतर एक बायोलॉजिकल क्लॉक मौजूद होता है। ठीक उसी प्रकार सूरजमुखी के फूलों में भी एक विशेष प्रकार की व्यवस्था होती है, जिसे हम हेलिओ ट्रॉपिज्म के नाम से जाना करते हैं।

 यह सूरजमुखी की जैविक घड़ी के नाम से भी जाना जाता है। सूर्य की किरणों का पता लगाकर यह फूल को उसी ओर मोड़ने के लिए प्रेरित करती है, जिस ओर सूर्य की दिशा होती है।

इस खोज द्वारा इस बात का भी पता लगाया गया कि ये फूल रात्रि के समय आराम किया करते हैं। तथा दिन में सूर्य का प्रकाश प्राप्त करते ही सक्रिय हो जाते हैं।

 जैसे-जैसे सूर्य का प्रकाश तीव्र होता है ठीक उसी तरह सूरजमुखी के फूलों की सक्रियता भी बढ़ती रहती है। हेलिओ ट्रॉपिज्म ही वह प्रक्रिया है, 

जिस कारणवश सूरजमुखी के फूल का मुखरा सूर्य की दिशा की ओर ही होता है।







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