गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा लगभग 13 दिनों तक उसी घर में निवास करती है। क्यूँ
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा लगभग 13 दिनों तक उसी घर में निवास करती है, क्योंकि यह माना जाता है कि आत्मा को अपने शरीर से अलग होने के बाद कुछ समय लगता है ताकि वह अपने नए जीवन की तैयारी कर सके।
गरुड़ पुराण के अनुसार, जब कोई व्यक्ति मरता है, तो उसकी आत्मा उसके शरीर से अलग हो जाती है और वह एक मध्यवर्ती अवस्था में प्रवेश करती है, जिसे "प्रेत" अवस्था कहा जाता है। इस अवस्था में, आत्मा को अपने पिछले जीवन की यादें और अनुभवों को संसाधित करने का समय मिलता है।
यह माना जाता है कि आत्मा लगभग 13 दिनों तक अपने पिछले जीवन की यादें और अनुभवों को संसाधित करती है, और फिर वह अपने नए जीवन की तैयारी करने लगती है। इस प्रक्रिया के दौरान, आत्मा अपने परिवार और प्रियजनों के साथ जुड़ी रहती है, और वह उनके साथ संवाद करने का प्रयास करती है।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उसके नए जीवन की तैयारी करने का समय है। इस प्रक्रिया के दौरान, आत्मा को अपने पिछले जीवन की गलतियों को सुधारने और अपने नए जीवन में सुधार करने का अवसर मिलता है।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा लगभग 13 दिनों तक उसी घर में निवास करती है।🧵
क्यूँ करवाया जाता है गरुड़ 🦅 पुराण का पाठ
गरुड़ पुराण के अनुसार जब किसी के घर में किसी की मौत हो जाती है तो 13 दिन तक गरुड़ पुराण का पाठ रखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार कोई आत्मा तत्काल ही दूसरा जन्म धारण कर लेती है। किसी को 3 दिन लगते हैं, किसी को 10 से 13 दिन लगते हैं और किसी को सवा माह लगते हैं लेकिन जिसकी स्मृति पक्की, मोह गहरा या अकाल मृत्यु मरा है तो उसे दूसरा जन्म लेने के लिए कम से कम एक वर्ष लगता है। तीसरे वर्ष उसका अंतिम तर्पण किया जाता है। फिर भी कईं ऐसी आत्माएं होती हैं जिन्हें मार्ग नजर नहीं आता है और वे भटकती रहती हैं।
गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा लगभग 13 दिनों तक उसी घर में निवास करती है। ऐसी स्थिति में यदि घर में गरुड़ पुराण का नियमित पाठ किया जाता है तो इसके श्रवण मात्र से ही आत्मा को शांति तथा मोक्ष की प्राप्ति संभव हो जाती है। इसके अलावा इसमें जीवन से जुड़े सात ऐसे महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं, जिनका पालन प्रत्येक व्यक्ति को बड़ी ही सहजता के साथ करना चाहिए।
गरुड़ पुराण क्या है
एक बार गरुड़ ने भगवान विष्णु से प्राणियों की मृत्यु, यमलोक यात्रा, नरक-योनियों तथा सद्गति के बारे में अनेक गूढ़ और रहस्य युक्त प्रश्न पूछे। उन्हीं प्रश्नों का भगवान विष्णु ने सविस्तार उत्तर दिया। ये प्रश्न और उत्तर की श्रृंखला ही गरुड़ पुराण है। गरुड़ पुराण में स्वर्ग-नरक, पाप-पुण्य के अलावा भी बहुत कुछ है। उसमें ज्ञान, विज्ञान, नीति, नियम और धर्म की बाते हैं। गरुड़ पुराण में एक ओर जहां मौत का रहस्य है तो दूसरी ओर जीवन का रहस्य छिपा हुआ है। इससे हमें कई तरह की शिक्षाएं मिलती हैं। गरुड़ पुराण में, मृत्यु के पहले और बाद की स्थिति के बारे में बताया गया है। यह पुराण भगवान विष्णु की भक्ति और उनके ज्ञान पर आधारित है। प्रत्येक व्यक्ति को यह पुराण पढ़ना चाहिए। गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध धार्मिक ग्रंथों में से एक है। 18 पुराणों में से इसे एक माना जाता है। गरुड़ पुराण में हमारे जीवन को लेकर कई गूढ़ बातें बताई गई हैं जिनके बारें में व्यक्ति को जरूर जनाना चाहिए।क्यों सुनाते हैं इसे मृत्यु के बाद
इसमें मृत्यु के पहले और बाद की स्थिति के बारे में बताया गया है इसीलिए यह पुराण मृतक को सुनाया जाता है। 13 दिनों तक मृतक अपनों के बीच ही रहता है। इस दौरान गरुड़ पुराण का पाठ रखने से वह स्वर्ग-नरक, गति-सद्गति, अधोगति, दुर्गति आदि कई तरह की गतियों के बारे में जान लेता है। आगे की यात्रा में उसे किन-किन बातों का सामना करना पड़ेगा, कौन से लोक में उसका गमन हो सकता है, ये सभी वह गरुड़ पुराण सुन कर जान लेता है।
मृत्यु के उपरांत घर में इसका पाठ होता है तो इस बहाने मृतक के परिजन यह जान लेते हैं कि बुराई क्या है और सद्गति किस तरह के कर्मों से मिलती है ताकि मृतक और उसके परिजन दोनों ही यह भली-भांति जान लें कि उच्च लोक की यात्रा करने के लिए कौन से कर्म करने चाहिएं।गरुड़ पुराण हमें सत्कर्मों के लिए प्रेरित करता है। सत्कर्म और सुमति से ही सद्गति और मुक्ति मिलती है। गरुड़ पुराण में व्यक्ति के कर्मों के आधार पर दंड स्वरूप मिलने वाले विभिन्न नरकों के बारे में बताया गया है। गरुड़ पुराण के अनुसार कौन-सी चीजें व्यक्ति को सद्गति की ओर ले जाती हैं, इस बात का उत्तर भगवान विष्णु ने दिया है। इसमें हमारे जीवन को लेकर कई गूढ़ बातें बताई गई हैं। गरुड़ पुराण के 19 हजार श्लोकों में से बचे 7 हजार श्लोकों में गरुड़ पुराण में ज्ञान, धर्म, नीति, रहस्य, व्यावहारिक जीवन, आत्मा, स्वर्ग-नरक और अन्य लोकों का वर्णन मिलता है। इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, सदाचार, निष्काम कर्म की महिमा के साथ यज्ञ, दान, तप, तीर्थ आदि शुभ कर्मों में सर्व-साधारण को प्रवृत्त करने के लिए लौकिक और पारलौकिक फलों का वर्णन किया गया है। पूर्व जन्म में जातक ने जैसे कर्म किए होते हैं, उन्हीं के आधार पर वह पृथ्वी पर नया
जन्म लेता है।
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