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मार्च, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कर्मों का प्रतिबिंब️ |

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एक चित्रकार था, जो अद्धभुत चित्र बनाता था। लोग उसकी चित्रकारी की काफी प्रशंसा करते थे। एक दिन श्री कृष्ण मंदिर के भक्तों ने उनसे कृष्ण और कंस का एक चित्र बनाने की इच्छा व्यक्त की। चित्रकार तुरन्त इसके लिये तैयार हो गया क्योंकि यह भगवान् का काम था, पर उसने कुछ शर्ते रखी। उसने कहा मुझे योग्य पात्र चाहिए अगर वो मिल जाएं तो मैं आसानी से चित्र बना दूंगा। कृष्ण जी के चित्र लिए एक योग्य नटखट बालक और कंस के लिए एक क्रूर भाव वाला व्यक्ति लाकर दें तब मैं चित्र बनाकर दूंगा। कृष्ण मंदिर के भक्त एक बालक ढूंढ कर ले आये, बालक सुन्दर था। चित्रकार ने उसे पसन्द किया और उस बालक को सामने रख बालकृष्ण का एक सुंदर चित्र बनाया। अब बारी कंस की थी पर क्रूर भाव वाले व्यक्ति को ढूंढना थोडा मुश्किल था ! जो व्यक्ति कृष्ण मंदिर वालो को पसंद आता वो चित्रकार को पसन्द नहीं आता क्योंकि उसे वो भाव मिल ही नहीं रहे थे… इसी इंतजार में कई साल गुजर गए तस्वीर अधूरी ही रही। तस्वीर पूरी करवाने के लिए लोग आखिरकार थक-हार कर उस चित्रकार को जेल में ले गए, जहाँ उम्रकैद काट रहे अपराधी थे। उनमें से एक व्यक्ति को चित्रकार ने पसन्द किया ...

सेफ्टी पिन

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  हमेशा कहती हैं कि ज़िंदगी में कभी भी किसी भी चीज़ को कम मत आंको. छोटी-से-छोटी चीज़ भी व आने पर अनमोल बन जाती है. ‘जहां काम आवे सुई का करे तरवारि’, अपनी इसी सोच के कारण मां अपनी चूड़ियों में हमेशा दो-तीन सेफ्टी पिन लटकाए रखती हैं. मुझे और दीदी को उनकी यह आदत हमेशा से ही बहुत अखरती रही है. “मां, ऐसे देहातन की तरह मत रहाकरो. चूड़ी में सेफ्टी पिन टांगने का क्या तुक?” “कभी भी चप्पल टूट जाए, कहीं से कपड़ा फट जाए. पेटीकोट का नाड़ा टूट जाए, तो इस छोटी-सी चीज़ से तुरंत अपनी लाज बचाई जा सकती है. इसलिए तुम दोनों बहनों को भी मैं यही सीख दूंगी कि इसे हमेशा अपने पास रखा करो.” हम लापरवाही से सिर हिला देते, पर मां अपनी धुन की पक्की थीं. वे चुपके-से हमारी फ्रॉक या स्कर्ट की जेब में या पेंसिल बॉक्स में यह छोटा-सा डिवाइस खिसका ही देती थीं. एक-दो मौक़ों पर यह डिवाइस सचमुच डूबते को तिनके का सहारा साबित भी हो गया. एक बार स्कूल में दीदी की सलवार का नाड़ा निकल गया, तो एक बार मेरे जूते की बेल्ट टूट गई, तब इसी से हमारी लाज बची. तभी से मां की सीख को जीवन में उतारते हुए हम बहनें भी छोटी-से-छोटी चीज़ की कद्र करने लगी थ...

सौगात ए मोदी"

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  मोदी जी की अनेक खूबियों में से एक सबसे बड़ी खूबी ये है कि मोदी जी दाहिने हाथ से हाथ मिलाते हुए बाएँ हाथ से अगले को झापड़ मार देते हैं. और, झापड़ भी ऐसा कि... अगले का पूरा गाल ही सुन्न हो जाये. अभी कल-परसों भी ऐसा कुछ हुआ. अभी, जहाँ पूरा देश कटेशरों को दी जाने वाली मोदी के "सौगात ए मोदी" पर चर्चा करने में व्यस्त था.. वहीं, कल लोकसभा में मोदी सरकार ने "इमिग्रेशन & फॉरेनर्स बिल 2025" पास करवा लिया. केंद्र सरकार का ये नया कानून केंद्रीय एजेंसियों को अब विदेशियों और अवैध घुसपैठियों पर कारवाई करने हेतु ज्यादा अधिकार देगा. तथा, अब ऐसे किसी भी मामले में पुलिस अधिकारी बिना वारंट के आरोपी को गिरफ्तार कर सकेंगे, जो कि भारत में अवैध रूप से घुसे हैं या फिर जाली दस्तावेजों पर प्रवेश करने जैसे अन्य गैर कानूनी कदम उठाए हैं. यहाँ तक कि... इस बिल में भारतीय केंद्रीय एजेंसियों को भारतीय अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अन्य ऐसी जगहों पर भी विदेशियों की जांच करने की और शक्ति प्रदान करेगा. सीधे-सीधे कहा जाए तो यह विधेयक विदेशियों को भारत से हटाने, उन्हें उनके देश डिपोर...

एक भड़ास से भरा पत्र शिक्षक के नाम...

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  नमस्कार गुरूजी, सादर प्रणाम! आज बाड़मेर-चौहटन रोड़ पर उण्डखा के पास मेरे मित्र श्रवण गौड़ के चाय के केबिन पर दोस्तों के साथ बैठा गपशप लगा रहा था I इतने में पुरानी यादों को ताजा करते हुये किसी दोस्त ने पूछा कि गिरधर तेरे मन में कोई गुस्सा है या किसी के प्रति भड़ास है I उसके प्रत्युत्तर में मैंने जो कहा वो आपके साथ भी साझा करना हूँ... हाँ तो बात 2006 की है मैं आठवीं क्लास में था, आठवीं कक्षा के विदाई समारोह का आयोजन होने वाला था I उस समय स्कूल में नियम था कि जब आठवीं की विदाई होती थी, तो आठवीं क्लास के बच्चों से ही 50-50 रुपये लेकर ग्रुप फोटो, नमकीन +मिठाई का एक पीस की प्लेट दी जाती थी और एक माला मंगवाई जाती थी (30 rs फोटो+ 10 rs प्लेट+10 rs माला = 50 रूपये)I पैसे विदाई समारोह से दो दिन पहले मंगवाये गये थे ताकि मालाओं आदि का इंतजाम हो सके I मैनें घर पर पैसे मांगे, लेकिन जिस घर में खाने के भी लाले पड़े, उस घर में 50 रूपये बचत होने का सवाल ही नहीं था, सो पैसो की व्यवस्था नहीं हो पाई I अब आता है विदाई समारोह वाला दिन, बाकि सभी विद्यार्थियों के पैसे जमा हो गये थे लेकिन मेरे नहीं हो पाय...

हर चुनौती में एक बड़ा अवसर छिपा होता है

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बहुत पुरानी बात है की किसी राज्य में एक राजा हुआ करता था| राजा ने एक बार अपने राज्य के लोगों की परीक्षा लेनी चाही| एक दिन उसने क्या किया कि सुबह सुबह जाकर रास्ते में एक बड़ा सा पत्थर रखवा दिया| अब तो सड़क से जो कोई भी निकलता उसे बड़ी परेशानी हो रही थी लेकिन कोई भी पत्थर हटाने की कोशिश नहीं कर रहा था | राजा यह सब छुपकर देख रहा था, कुछ देर बाद उसके राज्य के मंत्री और अन्य बड़े बड़े और धनी लोग भी वहाँ आए लेकिन किसी ने भी पत्थर हटाने की कोशिश नहीं की बल्कि सभी राजा को ही गालियाँ दे रहे थे कि रास्ते में इतना बड़ा पत्थर पड़ा है और राजा इसे हटवा क्यूँ नहीं रहा है| कुछ देर बाद वहाँ एक ग़रीब किसान आया जिसके सर पे बड़ा सा सब्जी का गट्ठर रखा हुआ था जब वह पत्थर से गुज़रा तो उसे वजन की वजह से काफ़ी परेशानी हो रही थी| तो उसने अपने सर से सब्जी की गठरी उतारी और पत्थर को पूरी ताक़त से हटाने में जुट गया| वो पत्थर बहुत बड़ा था लेकिन किसान ने हार नहीं मानी और कुछ ही देर में रास्ते से पत्थर हटा दिया| जैसे ही वो वहाँ से चला उसने देखा की पत्थर वाली जगह पर एक थैला पड़ा हुआ था जोकि राजा ने पत्थर के नीचे छुपा द...

पर्ची खिलाड़ी

 पाकिस्तान के क्रिकेट में एक शब्द बहुत प्रचलित है " पर्ची खिलाड़ी"!! मतलब अगर किसी खिलाड़ी के लिए किसी बड़े राजनेता या क्रिकेट बोर्ड के अधिकारी की लिखी सिफारिशी पर्ची आ जाती है तो उसका टीम में चयन निश्चित है। ये बात उधर आम जनता को भी पता होती है, पिछले दिनों खुशदिल शाह नामक एक खिलाड़ी बल्लेबाजी करने उतरा तो स्टेडियम में दर्शकों ने "पर्ची पर्ची" के नारे लगाए😂। हांलाकि भारत के बेहतरीन बल्लेबाज सौरव गांगुली भी एक समय इसी तरह सिफारिश से टीम में आये थे पर फिर उन्होंने अपने आप को सिद्ध किया था। भारतीय लोकतंत्र का दुर्भाग्य है कि पहले प्रधानमंत्री ही योग्यता या अपनी पार्टी के विश्वास की बजाय इस तरह पर्ची से चुने गए थे। इसलिए ये कुप्रथा कांग्रेस में बहुत अंदर तक घुस गई। इंदिरा गांधी तो कपड़ों की तरह मुख्यमंत्री बदलती थी। उत्तरप्रदेश में कांग्रेस ने लंबे समय राज किया पर अधिकतर मुख्यमंत्री 1–2 साल में ही बदल दिए जाते रहे। ऐसे में क्या ही विकास होता! दिल्ली में भी जो मुख्यमंत्री चुनी गई हैं वो पर्ची से ही हैं, पर कोई कारण नही की वो बढ़िया काम न कर सकें। पीछे की तस्वीरों में नेहरू क...

कहाँ हैं भगवान ?

 एक आदमी हमेशा की तरह अपने नाई की दूकान पर बाल कटवाने गया . बाल कटाते वक़्त अक्सर देश-दुनिया की बातें हुआ करती थीं ….आज भी वे सिनेमा , राजनीति , और खेल जगत , इत्यादि के बारे में बात कर रहे थे कि अचानक भगवान् के अस्तित्व को लेकर बात होने लगी . नाई ने कहा , “ देखिये भैया , आपकी तरह मैं भगवान् के अस्तित्व में यकीन नहीं रखता .“ तुम ऐसा क्यों कहते हो ?”, आदमी ने पूछा . “अरे , ये समझना बहुत आसान है , बस गली में जाइए और आप समझ जायेंगे कि भगवान् नहीं है . आप ही बताइए कि अगर भगवान् होते तो क्या इतने लोग बीमार होते ?इतने बच्चे अनाथ होते ? अगर भगवान् होते तो किसी को कोई दर्द कोई तकलीफ नहीं होती ”, नाई ने बोलना जारी रखा , “ मैं ऐसे भगवान के बारे में नहीं सोच सकता जो इन सब चीजों को होने दे . आप ही बताइए कहाँ है भगवान ?” आदमी एक क्षण के लिए रुका , कुछ सोचा , पर बहस बढे ना इसलिए चुप ही रहा .नाई ने अपना काम ख़तम किया और आदमी कुछ सोचते हुए दुकान से बाहर निकला और कुछ दूर जाकर खड़ा हो गया. . कुछ देर इंतज़ार करने के बाद उसे एक लम्बी दाढ़ी – मूछ वाला अधेड़ व्यक्ति उस तरफ आता दिखाई पड़ा , उसे देखकर लगता...

समाज से बहिष्कृत, पर समाज के ही एक अंग

 बीते सप्ताह महिला दिवस था. इस मौके पर समाज से बहिष्कृत, पर समाज के ही एक अंग से मिलने का मौका मिला. ऐसी महिलाएं जो ह्यूमन ट्रैफिकिंग, अपहरण या फिर परिचितों या खुद घर वालों के हाथों ही दगा का शिकार हो दिल्ली के जीबी रोड पर मौजूद कोठों तक पहुंच गई. गीतांजली बब्बर, जो कट कथा नाम के एनजीओ की संस्थापक हैं और बीते 15 साल से इस इलाके में समाज सेवा का काम कर रही हैं उनसे बातचीत करने का मौका मिला. कुछ ऐसे राज खुले जो मेरी देह को चीर कर आर पार हो गए. इस मुलाकात के दौरान गीतांजली ने मुझे बताया कि एक सेक्स वर्कर ने एक ही दिन (24 घंटों में) 70 क्लाइंटस को डील किया. यह एक बात मेरे जहन में ऐसी बसी कि मैंने उसकी कहानी को कागज पर उतारने का सोचा. यहां में आपसे साझा कर रही हूं यह दर्दनाक वाकया. जीबी रोड पर अपनी जिंदगी के 25 साल गुजारने वाली एक सेक्स वर्कर यमुना (बदला हुआ नाम) से बात करने का मौका मिला. यमुना ने जीबी रोड की अपनी आपबीती सुनाई वो मेरी रूह की नींव के आखरी पत्थर तक को चोट दे गई. यमुना ने बताया कि यहां महिलाओं को अक्सर पूरी तरह नशे में रखा जाता है, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा कस्टमर्स को ले प...

दो बीमार आदमी

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  दो बीमार व्यक्ति एक अस्पताल के कमरे में रहते हैं। उनमें से एक का बिस्तर कमरे की एकमात्र खिड़की के पास लगा था। दुर्भाग्यवश दूसरा मरीज हिल नहीं पा रहा था और उसे अस्पताल के बिस्तर पर सीधा लेटना पड़ा। खिड़की पर खड़ा आदमी बिस्तर पर पड़े मरीज को हर दिन बताता था कि उसने बाहर क्या देखा। कितना सुन्दर मौसम है! सड़क के उस पार का पार्क सुन्दर है। वहाँ एक झील भी है. बत्तखें पानी में खेल रही हैं। तीन बच्चे झील में अपनी प्लास्टिक की नावें तैरा रहे हैं। एक वृद्ध दम्पति एक दूसरे का हाथ थामे हुए, विभिन्न रंगों के फूलों से सजे रास्ते पर चल रहे हैं। दूर से आप शहर की गगनचुंबी इमारतें देख सकते हैं। » खिड़की पर खड़ा आदमी हर दिन अपने रूममेट को बताता था कि बाहर क्या हो रहा है। बाद वाले ने अपनी आंखें बंद कर लीं और फिर बाहरी दृश्यों की कल्पना एक पेंटिंग की तरह की। इससे उसे बहुत मदद मिली. यह उपचारात्मक भी था और इससे उन्हें अपने दैनिक जीवन की निराशा से बचने में मदद मिली। सप्ताह बीत गए. एक शाम खिड़की पर खड़ा आदमी शांतिपूर्वक सोते हुए मर गया। दो दिन बाद, बिस्तर पर पड़े मरीज ने दूसरे बिस्तर पर जाने तथा अपने पिछ...

औरतों की त्रिया चरित्र

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  एक प्यासा आदमी एक कुएं के पास गया, जहां एक जवान_औरत पानी भर रही थी उस आदमी ने औरत से थोड़ा पानी पिलाने के लिए कहा खुशी से उस औरत ने उसे पानी पिलाया। पानी पीने के बाद उस आदमी ने औरत से पूछा कि आप मुझे औरतों की त्रिया चरित्र के बारे में कुछ बता सकती हैं??? इतना कहने पर वह औरत जोर जोर से चिल्लाने लगी बचाओ... बचाओ... उसकी आवाज सुनकर गांव के लोग कुएं की तरफ दौड़ने लगे तो उस आदमी ने कहा कि आप ऐसा क्यों कर रही हैं, तो उस औरत ने कहा ताकि गांव वाले आएं और आपको खूब पीटें और इतना पीटें की आपके होश ठिकाने लग जाएं। यह बात सुनकर उस आदमी ने कहा मुझे माफ करें, मैं तो आपको एक भली और इज्ज़तदार औरत समझ रहा था। तभी उस औरत ने कुएं के पास रखा मटके का सारा पानी अपने शरीर पर डाल लिया और अपने शरीर को पूरी तरह भींगा डाला। इतने देर में गांव वाले भी कुएं के पास पहुंच गए। गांव वालों ने उस औरत से पूछा कि क्या हुआ ? औरत ने कहा मैं कुएं में गिर गई थी इस भले आदमी ने मुझको बचा लिया। यदि यह आदमी यहां नही रहता तो आज मेरी जान चली जाती। गांव वालों ने उस आदमी की बहुत तारीफ की और उसको कंधों पर उठा लिया। उसका खूब आदर सत्...

"यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भरा हुआ है।"

 एक 6 वर्ष का लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था। अचानक से उसे लगा की,उसकी बहन पीछे रह गयी है। वह रुका, पीछे मुडकर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है। लडका पीछे आता है और बहन से पुछता है, "कुछ चाहिये तुम्हे ?" लडकी एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है। बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी है। दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ .... अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पुछा, "सर, कितनी कीमत है इस गुड़िया की ?" दुकानदार एक शांत व्यक्ती है, उसने जीवन के कई उतार चढाव देखे होते है। उन्होने बडे प्यार और अपनत्व से बच्चे से पुछा, "बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो?" बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोडी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर लाया था । दुकानदार वो सब लेकर यूँ गिनता है जैसे पैसे गिन रहा हो। सीपें गिनकर वो बच्चे की तरफ देखने लगा...

शेर ने टपके से और आदमी ने शेर से मुक्ति पाई !!

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  एक बार की बात है, एक गांव में शेर आ गया, अब शेर तो शेर है, सब उससे बचने के लिए इधर-उधर छुपने लगे, धीरे-धीरे शाम हो गई और बारिश शुरू हो गई, बारिश भी ऐसी मुसलाधार कि पिछले दो-तीन साल में कभी हुई ना हो... एक तो शेर की अफवाह और दूसरी बारिश, सभी हड़बड़ी में छुपते-छुपाते अपने घरों में दुबक गए... इसी भागदौड़ में किसी का गधा रस्सी तुड़वा कर भाग गया !! 😳 अब तीन-तीन समस्याएं पैदा हो गई, एक तो गांव में शेर आया हुआ है, तेज बारिश हो रही है, और गधा खो गया है और शेर ने उसे पकड़ लिया तो रोजगार की समस्या !!😔 तो उस आदमी ने अपनी पत्नी से कहा मैं गधे को ढूंढ कर लाता हूं, पत्नी कहती है अरे गांव में शेर आया हुआ है अभी मत जाइए, तब आदमी कहता है कि शेर तो कुछ नहीं शेर से ज्यादा डर तो "टपके" का है! अब इतनी मूसलाधार बारिश में उनको डर था कि कहीं उनका घर टपकने से ढह न जाए, वह शेर से भी बड़ी समस्या थी !! संयोग से शेर भी बारिश के कारण उससे बचने के लिए उनके घर की दीवार के साथ पीठ लगाकर खड़ा था, उसने इस बात को सुन लिया कि टपका ऐसा कौन सा प्राणी है जो मुझसे भी खतरनाक है 🤔, इस जीव का तो पहली बार नाम सुना ...

नाव में छेद की मरम्मत

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  एक आदमी को एक नाव पेंट करने के लिए कहा गया। वह अपना पेंट और ब्रश लाया और नाव को चमकीले रंग से रंगना शुरू किया, जैसा कि मालिक ने उससे कहा था। पेंटिंग करते समय, उसने एक छोटा सा छेद देखा और चुपचाप उसकी मरम्मत की। जब उसने पेंटिंग पूरी की, तो उसने अपना पैसा लिया और चला गया। अगले दिन, नाव का मालिक पेंटर के पास आया और उसे एक अच्छा चेक भेंट किया, जो पेंटिंग के भुगतान से कहीं अधिक था। पेंटर को आश्चर्य हुआ और उसने कहा, "आपने मुझे नाव को पेंट करने के लिए पहले ही भुगतान कर दिया है सर!" "लेकिन यह चेक जॉब के लिए नहीं है। यह नाव में छेद की मरम्मत के लिए है।” "आह! लेकिन यह इतनी छोटी सी सेवा थी... निश्चित रूप से यह मुझे इतनी छोटी सी चीज के लिए इतनी अधिक राशि देने के लायक नहीं है।" “मेरे प्यारे दोस्त, तुम नहीं समझे। आपको बताते हैं क्या हुआ था: “जब मैंने तुमसे नाव को पेंट करने के लिए कहा, तो मैं छेद का उल्लेख करना भूल गया। “जब नाव सूख गई, तो मेरे बच्चे नाव ले गए और मछली पकड़ने की यात्रा पर निकल गए। "वे नहीं जानते थे कि एक छेद था। मैं उस समय घर पर नहीं था। "जब मैं वापस...

गुस्से को नियंत्रित करने का एक सुंदर उदाहरण

  एक वकील ने सुनाया हुआ एक ह्यदयस्पर्शी किस्सा "मै अपने चेंबर में बैठा हुआ था, एक आदमी दनदनाता हुआ अन्दर घुसा हाथ में कागज़ो का बंडल, धूप में काला हुआ चेहरा, बढ़ी हुई दाढ़ी, सफेद कपड़े जिनमें पांयचों के पास मिट्टी लगी थी उसने कहा, "उसके पूरे फ्लैट पर स्टे लगाना है बताइए, क्या क्या कागज और चाहिए... क्या लगेगा खर्चा... " मैंने उन्हें बैठने का कहा, "रग्घू, पानी दे इधर" मैंने आवाज़ लगाई वो कुर्सी पर बैठे उनके सारे कागजात मैंने देखे उनसे सारी जानकारी ली आधा पौना घंटा गुजर गया "मै इन कागज़ो को देख लेता हूं आपकी केस पर विचार करेंगे आप ऐसा कीजिए, बाबा, शनिवार को मिलिए मुझसे" चार दिन बाद वो फिर से आए वैसे ही कपड़े बहुत डेस्परेट लग रहे थे अपने भाई पर गुस्सा थे बहुत मैंने उन्हें बैठने का कहा वो बैठे ऑफिस में अजीब सी खामोशी गूंज रही थी मैंने बात की शुरवात की " बाबा, मैंने आपके सारे पेपर्स देख लिए आप दोनों भाई, एक बहन मा बाप बचपन में ही गुजर गए तुम नौवीं पास। छोटा भाई इंजिनियर आपने कहा कि छोटे भाई की पढ़ाई के लिए आपने स्कूल छोड़ा लोगो के खेतों में दिहाड़ी पर ...