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अप्रैल, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

एनआईए को मिली आतंकी तहव्वुर राणा की 18 दिन की रिमांड,

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 मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा को गुरुवार को भारत लाने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। यहां अदालत ने राणा को एनआईए की 18 दिन की हिरासत में भेज दिया है। एनआईए करेगी पूछताछ पीटीआई के मुताबिक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा को कोर्ट के आदेश पर 18 दिनों की हिरासत में ले लिया, जिसके दौरान उससे 26/11 के घातक आतंकवादी हमले के पीछे की पूरी साजिश का पता लगाने के लिए विस्तार से पूछताछ की जाएगी। एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया था आतंकवाद विरोधी एजेंसी ने अमेरिका से उसके सफल प्रत्यर्पण के बाद गुरुवार शाम यहां इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर पहुंचने पर औपचारिक रूप से उसे गिरफ्तार करने के बाद पटियाला हाउस में एनआईए की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया था। सुरक्षा वाले काफिले में पटियाला हाउस पहुंचाया गया अदालत ने शुक्रवार को राणा को 18 दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया, जिसके बाद उसे दिल्ली पुलिस के विशेष हथियार और रणनीति (एसडब्ल्यूएटी) और अन्य सुरक्षाकर्मियों के भारी सुरक्षा वाले काफिले म...

आंधी-बारिश और वज्रपात से फसलों को भारी नुकसान, बिहार में 37 और यूपी में 14 मरे..

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 कई दिनों तक गर्मी से बुरी तरह झुलसाने के बाद मौसम में आया बदलाव कहर बनकर टूटा है। आंधी-बारिश और वज्रपात के कारण बिहार में 59 और उत्तर प्रदेश में 25 लोगों की मौत हो गई। झारखंड में चार और हरियाणा व उत्तराखंड में दो-दो लोगों की मौत की खबर है। खेत में पानी भरने से फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। दिल्ली समेत एनसीआर तेज आंधी के साथ ही हुई बारिश मौसम का विमान सेवाओं पर भी असर पड़ा। पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिल्ली समेत एनसीआर तेज आंधी के साथ कहीं हल्की वर्षा हुई तो कहीं ओले भी पड़े। एक घंटे के भीतर तापमान छह से 10 डिग्री तक गिर गया। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊपरी हिस्सों में भारी हिमपात तो निचले क्षेत्रों में वर्षा हुई। आज से 48 घंटे मौसम में रहे बदलाव मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 से 48 घंटे में मौसम बदलाव जारी रहेगा। कई जगहों पर तेज हवा चल सकती है और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। पंजाब में शुक्रवार और शनिवार को तेज हवाएं चलने और वर्षा का आरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बिहार में 59 लोगों की जान गई बिहार में गुरुवार को वज्रपात व आंधी-पानी से पेड़, दीवार और कर्...

कहां जाकर रुकेंगे डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिका ने चीन पर लगाया 145 प्रतिशत टैरिफ

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 अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध गहराता जा रहा है। व्हाइट हाउस ने गुरुवार को कहा कि अधिकांश चीनी वस्तुओं पर उसकी टैरिफ दर 145 प्रतिशत है। दरअसल, चीन द्वारा अमेरिकी उत्पाद पर 84 प्रतिशत शुल्क लगाने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चीनी उत्पाद पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था। चीन ने कहा-हम उकसावे से नहीं डरते बीबीसी ने गुरुवार को व्हाइट हाउस के हवाले से बताया कि यह नया टैरिफ फेंटेनाइल दवा का उत्पादन करने के आरोप में इस साल की शुरुआत में लगाए गए 20 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त है। इस तरह चीन पर कुल टैरिफ 145 प्रतिशत हो जाता है। दूसरी तरफ, चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि न तो हम झुकते हैं और न ही उकसावे से डरते हैं। अमेरिका द्वारा चीनी उत्पादों पर नया टैरिफ लगाने और भारत सहित 75 से अधिक देशों पर 90 दिनों तक टैरिफ के अमल को स्थगित करने की घोषणा के एक दिन बाद चीन ने यह टिप्पणी की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 1953 में अमेरिका के साथ युद्ध के दौरान तत्कालीन चीनी नेता माओ त्सेतुंग का एक वीडियो साझा किया। ईयू बातचीत के जरिये समाधान की संभावना इसके ...

सिकंदर या छछूंदर

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  कहते हैं कि आदमी वह जो सही समय पर सही निर्णय ले ले । लेकिन किसी ने यह नहीं बताया कि जो सही समय पर सही निर्णय नहीं ले पाता उसे क्या कहते हैं ? ये अब आप ही तय कीजिए कि उन्हें क्या कहा जाए ? जब एक 60 साल का "दादू" अपनी पोती की उम्र वाली लड़की से किसी मूवी में इश्क के पेंच लड़ाते नजर आए तो उसे क्या कहेंगे ? जब एक 55 साल का बूढ़ा आदमी संसद में किसी लड़की का गाल खींचता हुआ नजर आए , तो उसे क्या कहेंगे ? अभी IPL के मैच देखकर लोग धोनी को भी कहने लगे हैं कि "दद्दू, अब तो हम पर रहम करो और क्रिकेट को छोड़ दो" । मगर मजाल है जो ये लोग किसी की सुनें । अरे भाई , इनकी चमचा मंडली इन्हें सुनने दे ना ? वे लोग इन्हें चने के झाड़ पर चढ़ाए रखते हैं और खुद मलाई उड़ाते रहते हैं । तभी तो ये लोग हकीकत से सैकड़ों कोस दूर रहते हैं । यही हाल हो रहा है बॉलीवुड के एक भाईजान का । कहने को तो वह "नायक" कहलाता है लेकिन काम सारे ही "खलनायकों" वाले करता है । अब चाहे फुटपाथ पर सोते हुए गरीबों पर गाड़ी चढ़ाकर उन्हें "जन्नत" में 72 हूरों के पास पहुंचाने का मामला हो या जोधपुर...

बिछड़े सभी बारी बारी

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  गुरुदत्त साहब की एक सुप्रसिद्ध मूवी "कागज के फूल" का एक बहुत प्रसिद्ध गाना है देखी जमाने की यारी बिछड़े सभी बारी बारी ।। यह गाना अपने जमाने में सुपर हिट हुआ था । गाने को रफी साहब ने गाया भी बहुत शानदार तरीके से था । आज मुझे यह गाना क्यों याद आ रहा है ? पूछेंगे नहीं क्या ? अरे भाई ! इस देश में एक न्यूज चैनल है जिसका नाम है "खाज तक" । कहने को तो यह एक न्यूज चैनल है लेकिन इस चैनल पर न्यूज के बजाय "व्यूज" दिखाए जाते हैं जिन्हें देख सुन कर पूरे बदन में "खाज" मचने लगी जाती है । इसीलिए लोगों ने इस चैनल का नाम "खाज तक" चैनल रख दिया था । इस नामकरण के पीछे इस चैनल के मालिकों का योगदान भी कुछ कम नहीं है । वे "राज माता" की चमचागिरी में इतने गिर गए कि उन्होंने अपने चैनल का नाम "इटली तक" करने का मन बना लिया था । लेकिन ऐसा करने से उन्हें "राजमाता" ने रोक दिया क्योंकि इससे उनकी पोल खुल जाने का खतरा था । इस न्यूज चैनल के नाम पर एक "खानदान" विशेष की प्रशस्ति गान का कार्यक्रम उसके अस्तित्व में आने से अब तक बदस्तूर...

Waqf Bill: '...प्रदर्शन न करें मुसलमान !

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 Waqf Bill: '...प्रदर्शन न करें मुसलमान', मौलाना अरशद मदनी ने क्यों दी ये नसीहत? बोले- अकल को काबू रखें मोदी सरकार के वक्फ संशोधन कानून 2025 को लेकर मुसलमानों में भारी रोष है। हालात की गंभीरता को देखते हुए जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने लोगों से सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन न करने की अपील की है। मंगलवार को जारी बयान में मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि अपने साथ हुए अन्याय के खिलाफ प्रदर्शन करना गलत नहीं है। बस विरोध प्रदर्शन का तरीका सही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया गया तो सांप्रदायिक ताकतें आपको निशाना बना सकती हैं। इसलिए अपने जज्बात और अकल को काबू में रखा जाए। तरीका सही करने को कह रहा हूं: मौलाना मौलाना मदनी ने कहा कि मैं विरोध प्रदर्शन को मना नहीं कर रहा हूं बल्कि तरीका सही करने को कह रहा हूं। कहा कि आप सभाएं कीजिए, उसमें अपनी बात रखिये। रमज़ान के महीने में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इसमें बढ़ चढ़कर भाग लिया। पर्सनल ला बोर्ड अब दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम मे...

कुल्हाड़ी ️की धार

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 कुंदन काका एक फैक्ट्री में लकड़ियों के गट्ठर काटने का काम करते थे। फैक्ट्री मालिक उनके काम से बहुत खुश रहता और हर एक नए मजदूर को उनकी तरह कुल्हाड़ी चलाने को कहता। यही कारण था कि ज्यादातर मजदूर उनसे जलते थे। एक दिन जब मालिक काका के काम की तारीफ कर रहे थे तभी एक नौजवान हट्टा-कट्टा मजदूर सामने आया और बोला, “मालिक! आप हमेशा इन्हीं की तारीफ़ करते हैं, जबकि मेहनत तो हम सब करते हैं… बल्कि काका तो बीच-बीच में आराम भी करने चले जाते हैं, लेकिन हम लोग तो लगातार कड़ी मेहनत करके लकड़ियों के गट्ठर काटते हैं। इस पर मालिक बोले, “भाई! मुझे इससे मतलब नहीं है कि कौन कितना आराम करता है, कितना काम करता है, मुझे तो बस इससे मतलब है कि दिन के अंत में किसने सबसे अधिक लकड़ियों के गट्ठर काटे…। और इस मामले में काका आप सबसे 2-3 लकड़ियों के गट्ठर आगे ही रहते हैं…जबकि उन की उम्र भी हो चली है।” मजदूर को ये बात अच्छी नहीं लगी। वह बोला- अगर ऐसा है तो क्यों न कल लकड़ियों के गट्ठर काटने की प्रतियोगिता हो जाए। कल दिन भर में जो सबसे अधिक लकड़ियों के गट्ठर काटेगा वही विजेता बनेगा। मालिक तैयार हो गए। अगले दिन प्रतियोगिता शुरू हु...

अच्छे कर्म ...

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 एक गांव में रहने वाले गरीब धनीराम सेठ से शुरू होती है। जी हां, गरीब धनीराम सेठ, आप सोच रहे होंगे सेठ और वह भी गरीब, यह दोनों विरोधाभासी शब्द एक साथ कैसे? यह सब भाग्य का खेल है दोस्तों। हर इंसान के जीवन में कभी उधर तो कभी चढ़ाव आते हैं। उसी तरह धनीराम सेठ जी किसी जमाने में बहुत अमीर हुआ करते थे और उन्होंने खूब दान धर्म और पुण्य भी किया था, लेकिन समय पलटा और वह धीरे-धीरे अपना धन खोता गया। अंत में, वह इस हालत में पहुंच गया कि लोग उसे गरीब धनीराम सेठ के नाम से जानने लगे। लेकिन कहते हैं ना कि अच्छे कर्मों का फल देर-सवेर ही सही, मिलता जरूर है। ऐसा ही कुछ इस गरीब धनीराम सेठ के साथ भी होने वाला था। जिस गांव में यह सेठ रहता था, वहां एक बार राजा के लोगों ने ऐलान किया कि जिन्होंने भी अच्छे काम किए हैं, वे अपने अच्छे काम गिनवा कर राजा से इनाम ले सकते हैं। इस ऐलान को सेठ की पत्नी ने सुन लिया। सेठ की पत्नी बहुत खुश हो गई क्योंकि वह जानती थी कि अपने अच्छे दिनों में सेठ ने अनगिनत पुण्य के काम किए। पत्नी ने सेठ को यह बात बताई, तो सेठ भी खुश हो गया और बोला, "अगर ऐसा है तो फिर हमें बहुत बड़ा इनाम म...

बन्दर की सीख...

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बंदरों का सरदार अपने बच्चे के साथ किसी बड़े से पेड़ की डाली पर बैठा हुआ था। बच्चा बोला , ” मुझे भूख लगी है , क्या आप मुझे खाने के लिए कुछ पत्तियां दे सकते हैं ?” बन्दर मुस्कुराया , ” मैं दे तो सकता हूँ , पर अच्छा होगा तुम खुद ही अपने लिए पत्तियां तोड़ लो। “ ” लेकिन मुझे अच्छी पत्तियों की पहचान नहीं है।”, बच्चा उदास होते हुए बोला। “तुम्हारे पास एक विकल्प है , ” बन्दर बोला , ” इस पेड़ को देखो , तुम चाहो तो नीचे की डालियों से पुरानी – कड़ी पत्तियां चुन सकते हो या ऊपर की पतली डालियों पर उगी ताज़ी -नरम पत्तियां तोड़ कर खा सकते हो।” बच्चा बोला , ” ये ठीक नहीं है , भला ये अच्छी – अच्छी पत्तियां नीचे क्यों नहीं उग सकतीं , ताकि सभी लोग आसानी से उन्हें खा सकें ?” “यही तो बात है , अगर वे सबके पहुँच में होतीं तो उनकी उपलब्धता कहाँ हो पाती … उनके बढ़ने से पहले ही उन्हें तोड़ कर खा लिया जाता !”, ” बन्दर ने समझाया। ” लेकिन इन पतली डालियों पर चढ़ना खतरनाक हो सकता है , डाल टूट सकती है , मेरा पाँव फिसल सकता है , मैं नीचे गिर कर चोटिल हो सकता हूँ …”, बच्चे ने अपनी चिंता जताई। बन्दर बोला , “सुनो बेटा , एक बात हमेशा...

वक्फ बोर्ड अधिनियम पर मुसलमानों का मास्टरस्ट्रोक!

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  वक्फ बोर्ड अधिनियम पर मुसलमानों का मास्टरस्ट्रोक! राष्ट्रपति मुर्मु के फैसले पर उठे सवाल, देश में मच सकता है घमासान राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने वक्फ कानून से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई की मांग की है। इस पर चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कपिल सिब्बल समेत अन्य पक्षकारों को आश्वासन दिया कि वे इन याचिकाओं को सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे। द्रौपदी मुर्मु ने शनिवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को अपनी स्वीकृति दे दी है। संसद के दोनों सदनों में गहन बहस के बाद यह विधेयक पारित किया गया था। अब इस कानून की वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें इसे संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया गया है। यह अधिनियम संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है समस्त केरल जमीयतुल उलेमा सहित कई मुस्लिम संगठनों ने याचिकाएं दाखिल कर दावा किया है कि यह अधिनियम संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। जमीयत उलमा-ए-हिंद ने कहा है कि यह कानून मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता है और देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को चुनौती देता है। सं...

वक्फ बिल का समर्थन कर रहे नेता के घर तोड़फोड़...

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  वक्फ बिल का समर्थन कर रहे बीजेपी नेता के घर पर टूट पड़ी मुसलमानों की भीड़, लगा दी आग, डर के मारे अब मुस्लिमों से मांग रहे माफ़ी मणिपुर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष असकर अली के घर को रविवार रात भीड़ ने आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा कि भाजपा नेता ने वक्फ संशोधन अधिनियम का समर्थन किया था। अली ने शनिवार को सोशल मीडिया पर कानून के प्रति अपना समर्थन जताया था। रविवार रात करीब 9 बजे गुस्साई भीड़ उनके घर के बाहर जमा हो गई। उन्होंने तोड़फोड़ की और फिर घर को आग के हवाले कर दिया। जानिए पूरा मामला प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रविवार रात को थौबल जिले के लिलोंग हाओरीबी संब्रुखोंग में असकर अली के घर पर भीड़ पहुंची। भीड़ ने पहले तो तोड़फोड़ की और फिर आग लगा दी। मणिपुर फायर सर्विस के मौके पर पहुंचने के प्रयासों को प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों ने रोक दिया। भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने बताया कि असकर अली ने वक्फ बिल का समर्थन किया था और इसका विरोध करने वालों के खिलाफ टिप्पणी की थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने उसके घर में तोड़फोड़ की और आग लगा दी। माफ़ी मांग रहे मुस्लिम नेता इस घट...

रामनवमी एक नया कीर्तिमान बनाया है !

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 कल देश भर में रामनवमी का त्यौहार शांतिपूर्वक मना लिया गया । इस बार के रामनवमी के त्यौहार ने देश में एक नया कीर्तिमान बनाया है । इतिहास साक्षी है कि हर रामनवमी के जुलूस पर शांति प्रिय समुदाय द्वारा "पत्थर वर्षा" की रस्म अदायगी की जाती रही है । कहते हैं न कि यज्ञ में राक्षस लोग व्यवधान डालते ही डालते हैं । यह परंपरा पिछले 1300 वर्षों से चली आ रही है । इसे रस्म की तरह से निभा रहे हैं ये लोग । लेकिन इस बार यह रस्म अदायगी नहीं हुई । कहीं से एक भी पत्थर चलने की आवाज नहीं आई । यह एक आश्चर्यजनक घटना थी । बिना पत्थरबाजी के रामनवमी का जुलूस कैसे निकल गया ? इसने मेरे जैसे "लिखाड़" को भी सोचने पर मजबूर कर दिया । मैं तो सोचे बैठा था कि चाहे और कहीं पर भी पत्थर वर्षा हो या ना हो लेकिन पश्चिमी बंगाल में तो होगी ही क्योंकि यहां तो "दीदी" की "सेना" ऐसे पुनीत कार्यों के लिए हमेशा तैयार रहती है । अरे भाई, पत्थरबाजी के लिए नहीं , हिन्दुओं को उनकी औकात दिखाने के लिए । तभी तो बंगाल चुनावों के बाद दीदी की सेना के द्वारा सरेआम हिन्दुओं पर हमले होते हैं । उनका नरसंहार ह...

माने ना मेरा दिल दीवाना...

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 इधर लोकसभा में वक्फ बिल पर जैसे ही वोटिंग होनी शुरू हुई, उधर वायनाड़ की सड़कों पर जनता चांद तारे वाला हरा झंडा हाथ में लेकर निकल पड़ी । सब लोग विक्षिप्त होकर घूम रहे थे और सबकी जुबां पर एक ही तराना था "तू कहां ये बता इस कुफ्र की रात में माने ना मेरा दिल दीवाना हाय रे हाय, माने ना मेरा दिल दीवाना" लोगों की आंखें से मोती बरस रहे थे । होंठों से तराने फूट रहे थे । दिल से आह निकल रहीं थीं । लोग पागलों की तरह दौड़ रहे थे । ऐसा लग रहा था कि जैसे वे किसी को ढूंढ रहे थे । उनके इस विक्षिप्त व्यवहार से मैं चौंका नहीं क्योंकि वायनाड़ के लोग ऐसा व्यवहार कोई पहली बार नहीं कर रहे थे , वरन् ये लोग सन् 1947 से पहले से ऐसा व्यवहार करते आ रहे हैं । क्यों , भूल गए क्या ? क्या भीड़ू ? बड़ी जल्दी भूल जाते हैं आप लोग ! अरे भाई, तब उस समय की मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की मांग की थी ना तो क्या वायनाड़ वालों को पाकिस्तान मिल गया था ? नहीं ना ! ऐसे में उन बेचारों के दिलों पर क्या बीती होगी , किसी ने कभी सोचा है ? वो एक गाना है ना कि "मन तरपत हरि दर्शन को आज" उसी तर्ज पर इन लोगों का मन "पा...

डर के आगे ही जीत है...

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 एक गुंडा हेयर कटिंग और शेविंग के लिये सैलून में गया...* नाई से बोला कि- अगर मेरी कटिंग शेविंग ठीक से बिना कटे-छिले हुई तो “मुँह माँगा दाम और इनाम भी दूंगा - लेकिन कहीं ज़रा भी कट-छिल गया तो गर्दन उड़ा दूंगा....” डर के मारे बाज़ार के सभी नाईयों ने मना कर दिया ... अंत में वो गुंडा एक गाँव के नाई के पास पहुँचा जहाँ एक नया लड़का ही था ! उसने शर्त सुनकर कहा, ठीक है बैठो मैं बनाता हूँ ! उस लड़के ने काफी बढ़िया तरीके से गुंडे की हेयर कटिंग और शेविंग कर दी ! गुंडे ने खुश होकर लड़के को एक हजार रुपया दे दिया और पूछा :- तुझे अपनी जान जाने का डर नहीं था क्या ??? लड़के ने कहा : डर? डर कैसा?? पहल तो मेरे हाथ में ही थी ! गुंडे ने कहा : - “पहल तुम्हारे हाथ में थी” का मतलब नहीं समझा ! लड़के ने हँसते हुए कहा :- उस्तरा तो मेरे हाथ में ही था.. अगर आपको खरोंच लग भी जाती तो , मैं तुरंत आपकी गर्दन काट देता ! बेचारा गुंडा जवाब सुन कर पसीने से लथपथ हो गया नैतिक शिक्षा... डर के आगे ही जीत है... पहले भारत का राजनैतिक नेतृत्व यही सोचता था *धारा 370* *राम मंदिर* *पाकिस्तान पर Surgical* ज़रा भी एक्शन लिया तो द...

वक्फ पर लिया रिस्क, अगला टारगेट फिक्स!

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वक्फ पर लिया रिस्क, अगला टारगेट फिक्स! अब क्या करने जा रही मोदी सरकार, अमित शाह के बयान से बढ़ी सुगबुगाहट- VIDEO संसद से वक्फ संशोधन विधेयक पास हो चुका है, लेकिन पिछले तीन दिनों में घटे घटनाक्रम के बीच नई सुगबुगाहट की चर्चा भी शुरू हो चुकी है। चर्चा चल रही है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार अब देश में धर्मांतरण विरोधी कानून ला सकती है। गृह मंत्री के एक बयान के बाद इस चर्चा ने जोर पकड़ा है। हालांकि अभी यह सिर्फ चर्चा है, केंद्र की सरकार ने इस दिशा में कोई आधिकारिक तौर पर कदम नहीं उठाए हैं। तमाम सोशल मीडिया यूजर्स ने अमित शाह का एक वीडियो साझा किया है। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री सदन में धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए दिखाई दे रहे थे और कांग्रेस को जवाब दे रहे थे। शाह के इस बयान के मायने सोशल मीडिया यूजर्स इस तरह निकाल रहे हैं कि सरकार का अगला कानून अवैध धर्मांतरण होगा। देखें वीडियो Jayant Rokade (मोदी का परिवार ) (@jayant_rokade) on X Anti conversion Law soon.... BJP will fullfill all it promises. https://x.com/jayant_rokade/status/1907768317852660018?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etwee...

हिन्दू 120 करोड़ है मगर वफ्फ बिल के पक्ष मे.....

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  हिन्दू 120 करोड़ है मगर वफ्फ बिल के पक्ष मे 288 वोट पड़े जबकि मुसलमान महज 20 करोड़ की आबादी मे 232 वोट ले गए। अयोध्या के राम मंदिर की लड़ाई राम लला विराजमान बनाम सुन्नी वफ्फ बोर्ड थी लेकिन खुद अयोध्या का वोट वफ्फ के लिये पड़ा। जिस राजस्थान मे महिलाओ को इस्लाम से बचने के लिये जौहर करना पड़ा उसी राजस्थान के 11 सांसद वफ्फ के पक्ष मे थे। विजयनगर साम्राज्य को जलाने वाली मुस्लिम सल्तनतो को 9 वोट उसी विजयनगर (कर्नाटक) से मिल गए। वो सब भी छोड़िए जिन पंजाब और बंगाल को इस्लाम के नाम पर जलाकर तोड़ दिया गया उनकी जनता तक के प्रतिनिधियों ने वफ्फ के लिये वोट दिया। ये दर्शाने के लिये पर्याप्त है कि समाज मे एकता कितनी आवश्यक है। हिन्दुओ मे कट्टरता आयी है मगर परिपक्व होने मे समय है, अब समय गया ज़ब आप उम्मीदवार देखकर वोट करें। अब व्यक्ति का मूल्य ही नहीं है, ज्योतिरादित्य सिंधिया यदि 6 साल पहले वोट करते तो वफ्फ बोर्ड बचाने के लिये वोट करते मगर आज उन्होंने उसके खिलाफ वोट दिया है। आज व्यक्तिगत विचार नहीं... अपितु पार्टी के हिसाब से काम करना पड़ता है। कांग्रेस के भी कई सांसद होंगे जो वफ्फ के खिलाफ हों...

वक्फ बोर्ड की हिमाकत तो देखिए,

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  वक्फ बोर्ड की हिमाकत तो देखिए, इन 10 जगहों पर भी ठोक दिया दावा, जानिए इसके पास कितनी संपत्ति ??  👇कांग्रेस के कुकर्म देश पर बोझ 👇 लगातार जमीनों पर दावे और कब्जे के बाद वक्फ बोर्ड एक मालदार बोर्ड बन गया है। वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया के मुताबकि, वक्फ बोर्ड के पास लगभग 8.7 लाख वक्फ संपत्ति है, जिसमें अचल (872,804) और चल संपत्ति (16,716) शामिल हैं, जो पूरे भारत में फैली हुई Property Claims By Waqf Boards:  वक्फ संशोधन विधेयक संसद में पारित हो चुका है और अब नया कानून बनने जा रहा है। इस कानून के लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड जमीनों पर कब्जे में मनमानी नहीं कर सकेगा। आजादी के पहले से ही वक्फ बोर्ड ने अंधाधुंध संपत्तियों पर दावा और कब्जा करके बाबर बंशी मियां नेहरू खानदान के सहयोग से भारत में बेहिसाब संपत्ति अपने नाम कर ली। स्थिति ये है कि आज वक्फ बोर्ड के पास देश में सबसे अधिक निजी जमीन है। खास बात ये है कि इन जमीनों का कोई हिसाब-किताब नहीं है, यानी ये दस्तावेजों में ही दर्ज नहीं हैं। बता दें कि सेना और रेलवे के पास जो जमीन है वो निजी नहीं सरकारी मानी जाती है। 9.4 ...

पीएम मोदी के दबाव में मारी पलटी

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पीएम मोदी के दबाव में मारी पलटी.वक्फ बिल पर कैसे मिला साथ, संजय राउत ने किया खुलासा, बोले- क्या जरूरत थी फडणवीस को वक्फ संशोधन विधेयक 2025 लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो चुका है। दोनों सदनों में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पेश किया। सरकार की माने तो संसद में ये विधेयक बहुमत से पास हुआ है। हालांकि, यूबीटी का कहना है कि ये बिल बहुमत से नहीं आया। संजय राउत ने दावा किया कि अगर राज्यसभा में हमारे सभी सांसद मौजूद होते तो ये विधेयक पारित नहीं हो पाता। संजय राउत ने कहा कि हमारे कुछ सासंद बीमार थे और कुछ किसी कारणवश नहीं संसद में मौजूद नहीं थे, जिसके कारण असमर्थन में वोट कम पड़े। संजय राउत का बड़ा बयान विधेयक पारित होने के बाद इस दौरान संजय राउत ने वक्फ बिल के पास होने पर भी तंज कसा है। संजय राउत ने कहा है कि वक्फ बिल भारी बहुमत से नहीं आया है। आखिरी मिनट तक बीजेपी के बड़े नेता यूबीटी के साथ संपर्क में थे और समर्थन करने के लिए कह रहे थे, नहीं तो सीएम फडणवीस को ट्वीट करने की जरूरत नही...

वक्‍फ बिल पर हुई बहस से राहुल गांधी के लिए ये हैं 3 बड़े सबक :-

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  राहुल गांधी को वक्फ बिल पर ट्रोल होने की नौबत तो नहीं ही आने देनी चाहिये थी - और सोशल मीडिया पर कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की जगह राहुल गांधी के भाषण वीडियो वायरल होना चाहिये था. राहुल गांधी न सही, लोकसभा में तो प्रियंका गांधी वाड्रा भी पहुंच चुकी हैं, और सोनिया गांधी भी राज्यसभा में ही हैं - लेकिन गांधी परिवार के तीन तीन सदस्य होने के बावजूद वक्फ बिल के खिलाफ एक की भी अलग से कोई चर्चा न हो, तो क्या समझा जाये? वक्फ बिल पर संसद में 23 घंटे चर्चा हुई, लेकिन गांधी परिवार ने मोर्चा नेताओं के हवाले छोड़ दिया था. राहुल गांधी का आधी रात के ड्रेस के लिए ट्रोल होना भी कोई बड़ी बात नहीं है, ये तो उनके विरोधियों के लिए हर रोज का रूटीन बन चुका है - लेकिन खास मौकों के खास दस्तूर भी होते हैं. मौके पर दस्तूर तो निभाये ही जाने चाहिये. 1. ममता से सबक लें, और वैसे ही स्टैंड लें वक्फ बिल पर जैसे गौरव गोगोई और इमरान प्रतापगढ़ी ने संसद में मोर्चा संभाला है, धारा 370 पर बहस के दौरान तब कांग्रेस में रहे गुलाम नबी आजाद लीड रोल में दिखाई दे रहे थे - लेकिन राहुल गांधी का वैसा व्यवहार नहीं दिखा था, जै...

वक्फ बोर्ड क्या हैं ?

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 मानो आपके घर के पास कोई 10-15 ईंट बिछा के कुछ दिन बाद हरी चादर फैला दे और उसे मजार घोषित कर दे..... फिर अचानक कुछ मुसलमान वहाँ रोज इकट्ठा होने लगे और सजदा करे.. और जो आदमी बहा मजार पर रोज रहता है अचानक घोषणा कर दे कि में इस जगह को वक्फ को दान कर रहा हूं..... और वक्फ़ बोर्ड, उस जमीन को वक्फ की संपत्ति घोषित कर देता है... अब आप उस जमीन को शिकायत और प्रशाशन भी उस मजार को वहाँ से नहीं हटा सकता क्यों कि वो वक्फ की संपत्ति हो गई। और उसे कोर्ट भी नहीं सुनेगा सिर्फ वक्फ ट्रिब्यूनल ही सुनवाई करेगा। और जमीन अब इस्लामिक बोर्ड की हो गई। बस यही है लैंड जिहाद... अब नए वक्फ संशोधन बिल में क्या है... कोई आदमी जो भले वहाँ नमाज करे या कराए सिर्फ अपनी व्यक्तिगत संपत्ति को दान कर सकता है। सरकारी जमीन या किसी और की जमीन को दान नहीं कर सकता और वो जमीन उसकी व्यक्तिगत है इसके कागज दिखाने पड़ेंगे...... (जैसा ऊपर उस आदमी ने किया था) मान लो ये जमीन के कागज उसके पास हो तो भी वो वक्फ को नहीं दे सकता यही उसने इस्लाम 5 साल के अंदर कबूला हो। अब वक्फ बोर्ड को कोई जमीन दान में मिलती है तो उसे सीधा कब्जा नहीं कर सक...

वक्फ बिल से क्यों नाखुश हैं मुसलमान

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  वक्फ बिल से क्यों नाखुश हैं मुसलमान?  5 पॉइंट्स में समझें पूरा विवाद वक्फ संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश होगा। पिछले काफी समय से इसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। मुस्लिम संगठनों के अलावा विपक्ष भी वक्फ बिल का पुरजोर विरोध कर रहा है। इस बिल से कई मुस्लिम बुरी तरह से नाराज हैं। तो आइए जानते हैं कि वक्फ बिल में ऐसे कौन से बदलाव हैं? जिसका मुस्लिम समुदाय विरोध कर रहे हैं और वो इसे लेकर नाखुश हैं। 1. प्रॉपर्टी पर फंसा पेंच वक्फ बिल के तहत नया कानून लागू होने के बाद अगर वक्फ बोर्ड की संपत्ति रजिस्टर नहीं है, तो 6 महीने बाद वक्फ इसे लेकर कोर्ट नहीं जा सकता है। बता दें कि कई वक्फ 500-600 साल पुराने हैं, जिनके दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। ऐसे में वक्फ को डर है कि उसके कब्रिस्तान, मस्जिद और स्कूल कानूनी विवाद में फंस सकते हैं। 2. लिमिटेशन एक्ट ने बढ़ाई मुश्किल वक्फ बिल धारा 107 हटाने और वक्फ बोर्ड को लिमिटेशन एक्ट 1963 के दायरे में लाने का प्रावधान करता है। ऐसे में अगर किसी ने 12 साल या उससे अधिक समय तक वक्फ की संपत्ति पर कब्जा किया तो लिमिटेशन एक्ट के कारण वक्फ इस संदर्भ में कानूनी मदद नहीं ...

आज की कहानी:- क्रोध ️

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https://www.effectiveratecpm.com/hyngjujybc?key=36fb0ec3f7800566a9f890df92cbad83 एक सन्यासी अपने शिष्यों के साथ गंगा नदी के तट पर नहाने पहुंचा। वहाँ एक ही परिवार के कुछ लोग अचानक आपस में बात करते-करते एक दूसरे पर क्रोधित हो उठे और जोर-जोर से चिल्लाने लगे। संन्यासी यह देख तुरंत पलटा और अपने शिष्यों से पूछा; ”क्रोध में लोग एक दूसरे पर चिल्लाते क्यों हैं ?’ शिष्य कुछ देर सोचते रहे, एक ने उत्तर दिया, ” क्योंकि हम क्रोध में शांति खो देते हैं।" ”पर जब दूसरा व्यक्ति हमारे सामने ही खड़ा है तो भला उस पर चिल्लाने की क्या ज़रुरत है!! जो कहना है, वो आप धीमी आवाज़ में भी तो कह सकते हैं", सन्यासी ने पुनः प्रश्न किया। कुछ और शिष्यों ने भी उत्तर देने का प्रयास किया पर बाकी लोग संतुष्ट नहीं हुए। अंततः सन्यासी ने समझाया।। “जब दो लोग आपस में नाराज होते हैं तो उनके दिल एक दूसरे से बहुत दूर हो जाते हैं। और इस अवस्था में वे एक दूसरे को बिना चिल्लाये नहीं सुन सकते…। वे जितना अधिक क्रोधित होंगे, उनके बीच की दूरी उतनी ही अधिक हो जाएगी और उन्हें उतनी ही ज़ोर से चिल्लाना पड़ेगा। क्या होता है जब दो लोग प...