ग्राम पंचायत_चुनाव
गाँव में एक बार फिर से सरपंच चुनाव का मौसम आ रहा है। जो लोग अब तक किसी के दुःख-सुख में दिखाई नहीं देते थे, वे आजकल हर दरवाजे पर दस्तक देने लगेंगे —"कैसे हैं चाचा? सब कुशल-मंगल? घर में सब स्वस्थ हैं ?"जो पहले प्रधान रह चुके हैं, वे अब गाँव की टूटी हुई पुलिया और गिरी हुई नाली के पास खड़े होकर बड़ी शान से कहते हैं — "यह हमारे कार्यकाल का काम है, देखिए अब भी जैसे-तैसे टिकी हुई है।" और जो वर्तमान प्रधान हैं, वे हाथ जोड़ कर सफाई दे रहे हैं भाई साहब, सरकार से बजट ही नहीं आया, वरना हम क्यों नहीं बनवाते?" गाँव के लोग भी अब दो गुटों में बटने लगेंगे — कोई बोलेगा— "हम तो इन्हीं को वोट देंगे।" तो कोई बोलेगा — "इस बार तो दूसरे को मौका देंगे।" जहाँ पहले आपसी भाईचारा था, अब वहाँ चुनाव को लेकर मनमुटाव और तकरार शुरू होगी । अब गांव के हर मोड़, हर चौराहे और दुकान पर'चुनावी बैठक' होना शुरू हो जाएगा कुछ लोग चाय गुटखा और तंबाकू पर बिकना शुरू हो जाएंगे कल तक जो लोग किसी के यहां शादी ब्याह या मरनी मैं दरवाजे पर नहीं जाते थे वह भी लोगों का घूम-घूम कर हाल-चा...